Talaq की प्रतीक्षा कर रही महिला भी कर सकती है गर्भपात की मांग

तलाक (Talaq) की प्रतीक्षा कर रही महिला भी उस नियम के तहत गर्भपात की मांग कर सकती है, जो तलाकशुदा या विधवा महिलाओं को गर्भपात की मांग करने की अनुमति देता है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद एस भारद्वाज ने मोहाली की एक महिला द्वारा गर्भपात की मांग को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किए।
हाई कोर्ट ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान वैवाहिक स्थिति में बदलाव को सही मायने में समझा जाना चाहिए। ऐसी परिस्थिति जिसमें एक महिला को न्यूनतम प्रतीक्षा अवधि के कारण तलाक के लिए याचिका दायर करने से रोका जाता है, लेकिन वह गर्भवती हो जाती है और उसने अपनी शादी तोड़ने का फैसला किया है, उसे नुकसानदायक स्थिति में डालने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि तलाक ले चुकी महिला के लिए जो परिस्थितियां हैं, वही तलाक का इंतजार कर रही महिला से अलग नहीं हैं।
इस मामले में महिला की शादी जनवरी 2024 में हुई थी और वह 28 सप्ताह से अधिक की गर्भवती थी। उसका पति मई में उसे छोड़कर दुबई चला गया। महिला ने बताया कि वह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अपने पति के साथ वैवाहिक संबंध समाप्त करना चाहती है, लेकिन विवाह की तारीख से एक वर्ष की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि की वैधानिक आवश्यकता के कारण तलाक याचिका दायर नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि महिला ने यह भी उल्लेख किया कि उसे उसके पति ने त्याग दिया है तथा वह स्वयं अपने माता-पिता पर निर्भर है। उसके लिए बच्चे की देखभाल, आवश्यक सुविधाएं तथा शिक्षा प्रदान करने के लिए अतिरिक्त खर्च वहन करना संभव नहीं है। कोर्ट ने महिला को गर्भ को समाप्त करने के लिए मेडिकल बोर्ड के पास पेश होने और गर्भपात करवाने की इजाजत दे दी। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



