Brihaspativar: बृहस्पतिवार व्रत कथा और पूजा ऐसे करेंगे तो भगवान विष्णु बनाएंगे धनवान, बरसेगी कृपा

बृहस्पतिवार (Brihaspativar)/वीरवार(Virvar)/गुरुवार (Guruvar) का दिन भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करता है और गुरुवार व्रत की कथा कहता और सुनता है, उसकी गरीबी और कष्ट को भगवान विष्णु दूर कर देते हैं। जीवन में सुख समृद्धि के लिए गुरुवार के दिन आप भी इस गुरुवार व्रत कथा को सुनें या पढ़ें। ऐसे करने से भगवान विष्णु आपको धनवान बनाएंगे और हमेशा आप पर उनकी कृपा बनी रहेगी।
इसलिए लाभकारी है ये व्रत
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर व्यक्ति की कुंडली में गुरु मजबूत नहीं है और शादी में कई अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है, तो गुरुवार का व्रत काफी लाभकारी साबित हो सकता है। साथ ही, ज्योतिषी अविवाहित जातकों को गुरुवार का व्रत रखने की सलाह देते हैं। माना जाता है कि गुरुवार का व्रत करने से व्यक्ति को सभी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत हो जाता है।
ऐसे शुरू करें व्रत
ज्योतिषियों के अनुसार, गुरुवार व्रत की शुरुआत पौष मास को छोड़कर किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के पहले बृहस्पतिवार के दिन से करना शुभ माना जाता है।
इतने व्रत रखना शुभ
भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की कृपा पाने के लिए लगातार 16 गुरुवार का व्रत रखना चाहिए और 17वें गुरुवार को व्रत का उद्यापन करना चाहिए । मासिक धर्म की वजह से महिलाएं व्रत नहीं रख सकती है। गुरुवार का व्रत एक, तीन, पांच, सात और नौ साल या फिर आजीवन भी रख सकते हैं।
जानें, व्रत की पूजा विधि
गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करके पीले रंग के वस्त्र धारण कर लें।
भगवान विष्णु का ध्यान रखते हुए व्रत का संकल्प लें।
भगवान बृहस्पति देव की विधि-विधान से पूजा करें।
भगवान को पीले फूल, पीले चंदन के साथ पीले रंग का भोग लगाएं। आप चाहे तो भोग में चने की दाल और गुड़ ले सकते हैं।
इसके बाद धूप, दीप आदि जलाकर बृहस्पति देव के व्रत कथा का पाठ कर लें।
इसके बाद विधिवत तरीके से आरती करके भूल चूक के लिए माफी मांग लें।
केले की जड़ में जल अर्पण करने के साथ भोग आदि लगाएं।
फिर दिनभर फलाहार व्रत रखें और शाम को पीले रंग का भोजन ग्रहण कर लें।
बृहस्पति देव की आरती
जय वृहस्पति देवा,
ऊँ जय वृहस्पति देवा ।
छिन छिन भोग लगाऊँ,
कदली फल मेवा ॥
ऊँ जय वृहस्पति देवा,
जय वृहस्पति देवा ॥
तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर,
तुम सबके स्वामी ॥
ऊँ जय वृहस्पति देवा,
जय वृहस्पति देवा ॥
चरणामृत निज निर्मल,
सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक,
कृपा करो भर्ता ॥
ऊँ जय वृहस्पति देवा,
जय वृहस्पति देवा ॥
तन, मन, धन अर्पण कर,
जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर,
आकर द्घार खड़े ॥
ऊँ जय वृहस्पति देवा,
जय वृहस्पति देवा ॥
दीनदयाल दयानिधि,
भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता,
भव बंधन हारी ॥
ऊँ जय वृहस्पति देवा,
जय वृहस्पति देवा ॥
सकल मनोरथ दायक,
सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटाओ,
संतन सुखकारी ॥
ऊँ जय वृहस्पति देवा,
जय वृहस्पति देवा ॥
जो कोई आरती तेरी,
प्रेम सहित गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर,
सो निश्चय पावे ॥
ऊँ जय वृहस्पति देवा,
जय वृहस्पति देवा ॥
सब बोलो विष्णु भगवान की जय ।
बोलो वृहस्पतिदेव भगवान की जय ॥
इसके अलावा इस दिन हर पल भगवान विष्णु का भजन करें और उनका ध्यान करें। साथ ही, उनके भक्तिगीत भी सुनें। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है। हम दावा नहीं करते हैं कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।



