Gratuity: क्या है ग्रेच्युटी, कैसे होती है इसकी गणना, कब और कैसे मिलती है, जानें

ग्रेच्युटी (Gratuity) क्या है? What Is Gratuity? ग्रेच्युटी किसे मिलती है? Who Gets Gratuity? ग्रेच्युटी की गणना कैसे होती है? How Is Gratuity Calculated? ग्रेच्युटी कब मिलती है? When Is Gratuity Received? ग्रेच्युटी कैसे मिलती है। How To Get Gratuity? इसके बारे में इस लेख में आपको विस्तार से जानकारी मिलेगी।
ग्रेच्युटी क्या है What Is Gratuity
अगर आपको किसी कंपनी में नियमित काम करते हुए पांच वर्ष हो गए हैं, तो आप ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं। यानी किसी कंपनी में पांच साल लगातार काम नियमित करने पर ग्रेच्युटी मिलती है। अगर किसी कर्मचारी ने किसी कंपनी में चार साल आठ माह तक काम किया है, तो भी उसकी नौकरी पूरे पांच साल की मानी जाएगी और से उसे ग्रेच्युटी मिलेगी।
ग्रेच्युटी के रूप में काटा जाता है सैलरी का 4.81 फीसदी हर महीने
कंपनी की ओर से ऑफर लेटर मिलने के साथ उसमें दिए गए सीटीसी में ही ग्रेच्युटी का हिस्सा भी शामिल रहता है। जब आपको कंपनी की ओर से इन हैंड सैलरी मिलती है, तो उसमें से ग्रेच्युटी का हिस्सा पहले ही काट लिया जाता है। कई कंपनियां मूल वेतन यानी बेसिक सैलरी व अन्य अलाउंस का 4.81 फीसदी ग्रेच्युटी के रूप में देती हैं। ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के अनुसार, सैलरी का 4.81 फीसदी हर महीने ग्रेच्युटी के रूप में काटा जाता है।
इतनी राशि कटेगी
अगर किसी व्यक्ति की कुल सैलरी सालाना पांच लाख रुपये है, तो उसमें ग्रेच्युटी का हिस्सा 4.81 फीसदी होगा। यह राशि करीब 24050 रुपये वार्षिक होगी। आपकी सैलरी से हर महीने करीब दो हजार रुपये ग्रेच्युटी के लिए काटे जाएंगे। ग्रेच्युटी को देना कंपनी की जिम्मेदारी है, जबकि यह राशि आपकी ही सैलरी से हर महीने काटी जाती है।
कब मिलती है ग्रेच्युटी
ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के तहत हर नियोक्ता को कर्मचारी के लिए इसका प्रावधान जरूरी है। आपकी सैलरी में अनिवार्य रूप से ग्रेच्युटी का हिस्सा शामिल होता है। वैसे तो यह आपकी ही सैलरी का हिस्सा है, लेकिन कंपनियां इसे देती तभी हैं, जब आप उनके यहां पांच साल तक लगातार नौकरी करते हैं। अगर निर्धारित समय कंपनी के साथ पूरा नहीं करते हैं, तो आप ग्रेच्युटी पाने के हकदार नहीं होंगे।
ऐसे करते हैं गणना
किसी भी कंपनी में पांच साल की सेवा पूरी हो जाने के बाद नौकरी में पूरे किए गए हर साल के बदले सेवा के अंतिम माह की बेसिक सैलरी, यानी मूल वेतन और महंगाई भत्ते को जोड़कर (जिन्हें महंगाई भत्ता नहीं मिलता है, उन्हें सिर्फ बेसिक सैलरी से हिसाब लगाना होगा) 15 से गुणा की जाती है। इसके बाद हाथ आई रकम को सेवा में बिताए साल की संख्या से गुणा करते हैं, और अंत में हासिल रकम को 26 से भाग दिया जाता है। यही होती है आपको मिलने वाली ग्रेच्युटी की रकम।
ये है गणना का फार्मूला
अंतिम माह का बेसिक वेतन+महंगाई भत्ता x 15 x सेवा में दिए गए साल/26
अगर आपका अंतिम मास का बेतन व डीए 70000 रुपये है। और आपने नौकरी वर्ष 19 की है।
तो 70000x15x19÷26 यानी 767307 रुपये ग्रेच्युटी पाने के हकदार हुए।
इतने वर्ष काम करने पर इतनी मिलेगी
जैसेः अगर आपने किसी कंपनी में 19 साल नियमित काम किया। उस कंपनी में आपका आखिरी मूल वेतन यानी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता यानी डीए मिलाकर कुल 70000 रुपये दिया जाता था। तो आप 70000 को 15 से गुणा कर लीजिए तो 1050000 हुए। अब 1050000 को 19 से गुणा कीजिए तो 1995000 आएगा। इसे 26 से भाग दीजिए। तो 767307 रुपये हुए। यही आपको मिलने वाली ग्रेच्युटी होगी। 2000000 रुपये तक यानी ग्रेच्युटी के रूप में मिलने वाली रकम टैक्स फ्री रहती है, यानी उस रकम पर आपको कोई टैक्स आपको नहीं देना पड़ेगा। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



