Monkeypox : मंकीपॉक्स से घबराने की जरूरत नहीं, जानें, कितना खतरनाक है ये, कैसे करें बचाव

मंकीपॉक्स (Monkeypax) से घबराने की जरूरत नहीं है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को कहा कि एलएनजेपी (लोकनायक जयप्रकाश नारायण) अस्पताल में भर्ती मंकीपॉक्स के मरीज की हालत स्थिर है। भारद्वाज ने मंकी पॉक्स और डेंगू से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के लिए अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।
जानिए, क्या है मंकीपॉक्स
मंकीपॉक्स वायरस चेचक के समान दुर्लभ वायरल संक्रमण है। 1958 में यह पहली बार शोध के लिए रखे गए बंदरों में पाया गया था। इस वायरस का पहला मामला 1970 में सामने आया। मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्रों में यह रोग में होता है।
ये हैं इसके लक्षण
बार-बार तेज बुखार आना।
पीठ और मांसपेशियों में दर्द।
त्वचा पर दानें और चकते पड़ना।
खुजली की समस्या होना।
शरीर में सामान्य रूप से सुस्ती आना।
मंकीपॉक्स वायरस की शुरुआत चेहरे से होती है।
संक्रमण आमतौर पर 14 से 21 दिन तक रहता है।
चेहरे से लेकर बाजुओं, पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों पर रैशेस होना।
गला खराब होना और बार-बार खांसी आना।
ऐसे फैलता है संक्रमण
मंकीपॉक्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। ऐसे में लोगों को शारीरिक संपर्क से बचाव रखना चाहिए।
संक्रमित व्यक्ति या किसी व्यक्ति में पंकीपाक्स के लक्षण हैं, तो उसे तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए।
संक्रमित व्यक्ति को इलाज पूरा होने तक खुद को आइसोलेट रखना चाहिए।
मंकीपाक्स वायरस त्वचा, आंख, नाक या मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
यह संक्रमित जानवर के काटने से, या उसके खून, शरीर के तरल पदार्थ, या फर को छूने से भी हो सकता है।
ये है इसका इलाज
मंकीपॉक्स का कोई इलाज नहीं है। लेकिन चेचक का टीका मंकीपॉक्स को रोकने में 85 प्रतिशत प्रभावी साबित हुआ है। मंकीपॉक्स को यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने इसे कम जोखिम वाला वायरस बताया है। यह अपने आप ठीक होने वाली बीमारी है, मरीज चार सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। इसलिए घबराएं नहीं। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



