Daati Maharaj: जानें, कौन है दाती महाराज, जिनके खिलाफ दुष्कर्म के मामले में आरोप तय, क्या है मामला

दिल्ली (Delhi) में साकेत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में फतेहपुर बेरी स्थित शनिधाम के संस्थापक मदन लाल राजस्थानी उर्फ दाती महाराज समेत उनके दो भाइयों पर शुक्रवार को आरोप तय किए हैं। साथ ही, 18 अक्टूबर से अभियोजन के साक्ष्य दर्ज दाती महाराज करने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश भी दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नेहा ने मदनलाल राजस्थानी और उनके दो भाइयों अशोक और अर्जुन के खिलाफ दुष्कर्म समेत अन्य अपराधों के आरोप तय किए। अदालत में मौजूद आरोपितों ने गुनाह कबूल करने से इनकार कर दिया।
जानें, क्या है मामला
पीड़िता द्वारा सात जून 2018 को दाती महाराज के खिलाफ दी की गई दुष्कर्म की शिकायत पर पुलिस ने 11 जून, 2018 को एफआइआर दर्ज की थी। वर्ष 2019 में दुष्कर्म और धमकाने के आरोपों में आरोप पत्र दाखिल हुआ था। इसमें दाती और उनके तीन भाइयों-अशोक, अर्जुन और अनिल को आइपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म), 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध), 506 (धमकाना) व 34 (समान मेशा) का आरोपित बनाया गया। यह केस सीबीआइ को ट्रांसफर कर दिया गया। सीबीआइ ने चार सितंबर, 2020 में दाली व उनके दो भाइयों पर दुष्कर्म के आरोप में पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। गौरतलब है कि यह मामला काफी चर्चा में रहा था।
जानें, कौन है दाती महाराज
दाती महाराज का असली नाम मदन लाल है। वह राजस्थान के पाली जिले के गांव अलावास का निवासी है। माता-पिता के निधन के बाद वह ढोलक बजाकर पैसे कमाता था, क्योंकि उसके पिता यही काम करते थे। इस बीच, वह अपने भाइयों को लेकर दिल्ली आ गया। यहां उसने एक चाय की दुकान पर काम किया। कैटरिंग का बिजनेस भी किया। साल 1996 में वह राजस्थान के ही एक ज्योतिषी से मिला। उसके साथ रहते हुए उसने कुंडली देखना शुरू कर दिया। मुनाफा होने लगा तो उसने कैटरिंग का बिजनेस बंद करके एक ज्योतिष केंद्र खोल लिया। साथ ही, दाती महाराज नाम रख लिया। साल 1998 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक नेता के चुनाव जीतने की भविष्यवाणी की और वह तीत भी गया। नेता ने खुश होकर उसे फतेहपुर बेरी स्थित अपना पुश्तैनी मंदिर सौंप दिया, जिसकी दाती महाराज देखभाल करने लगा। उसके बाद हरिद्वार महाकुंभ में पंचायती महानिर्वाण अखाड़े ने दाती महाराज को महामंडलेश्वर बना दिया गया। इसके बाद उसने शनि मंदिर को नाम श्री सिद्ध शक्तिपीठ शनिधाम पीठाधीश्वर रख लिया और खुद को श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर परमहंस दाती जी महाराज घोषित कर दिया। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)


