Revdi And Guarantee: मुफ्त की रेवड़ी और चुनावी गारंटी कब तक?

दिल्ली (Delhi) में पिछले कुछ समय से मुफ्त की रेवड़ी और चुनावी गारंटी की होड़ लगी हुई है। मुफ्त में मिलने वाली सेवाएं कुछ समय के लिए जनता और नेताओं को फायदे का सौदा होती हैं। लेकिन इनके दूरगामी परिणाम घातक साबित हो सकते हैं। मुफ्त की योजनताओं की चलते देश की राजधानी संकट में डूब सकती है। मूलभूत सुविधाओं को सुचारू रखने के लिए फंड का प्रबंध करना भी चुनौती हो सकती है। मुफ्त की रेवड़ी के चक्कर में कई राज्यों की सरकारें संकट से जूझ रही हैं। दिल्ली में पांच फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की गारंटी और अरविंद केजरीवाल की गारंटी की होड़ लगी है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नरेंद्र मोदी की गारंटी के नाम से एक के बाद एक संकल्प पत्र जारी कर रही है, दूसरी ओर आम आदमी पार्टी (आप) अरविंद केजरीवाल की गारंटी दिल्ली के मतदाताओं के बीच रख रही है।
चुनावी रेवड़ी
गारंटी में मतदाताओं के लिए जो चुनावी रेवड़ी बांटी जा रही हैं, उससे प्रभावित होकर देश के दूर-दराज राज्यों के लोगों में भी एक ऐसी जिज्ञासा उत्पन्न हो रही है कि चलो दिल्ली चलें। राजनीतिक गलियारों में यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि दिल्ली के चुनाव में जो राजनीतिक दलों ने कई प्रलोभन भरी घोषणाएं की हैं, उससे आकर्षित होकर कई राज्यों से गरीब और बेरोजगार परिवार दिल्ली की ओर कूच कर सकते हैं।
चुनावी वादे
लोगों को लग रहा है कि दिल्ली पहुंचकर किसी तरह एक झुग्गी किराये पर ले लें या छोटी सी लागत से एक झुग्गी बना दें तो ये राजनेताओं के आश्वासन उन्हें आसानी से जीवन निर्वाह करने का रास्ता दे सकते हैं। चुनावी वादों के मुताबिक, हर झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले की मात्र पांच रुपये में भरपेट खाने की व्यवस्था भाजपा करेगी। उन्हें इन झुग्गियों की जगह नए मकान बनाकर उसमें उनका आशियाना बना देगी। केजरीवाल उन्हें मुफ्त की बिजली और पानी देंगे। उनके बच्चों को मुफ्त में अच्छे स्तर के सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा मिल जाएगी। स्कूलों तक बच्चों को पहुंचाने के लिए मुफ्त बस की सवारी होगी। महिलाओं को दिल्ली में घूमने के लिए खर्च नहीं करनी पड़ेगा। उनके बुजुर्ग तीर्थ यात्राओं का मुफ्त में आनंद लेंगे और उन बुजुर्गों को पांच हजार रुपये महीना पेंशन मिलेगी। बीमार पड़ने पर सभी का मुफ्त इलाज होगा।
ये वादे भी किए
महिलाओं को केजरीवाल के 21 सौ रुपये महीना और भाजपा के 25 सौ रुपये महीना घर के खर्चे के लिए दिया जाएगा। हर परिवार को राशन भी फ्री में दिया जाएगा। किसी भी महिला के गर्भवती होने पर भाजपा की तरफ से 21 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। कांग्रेस की चुनावी घोषणा के अनुसार, जब तक शिक्षित युवक-युवतियों को रोजगार नहीं मिल जाता है तब तक साढ़े सात हजार रुपये महीना सरकारी कोष से मिलेगा। ऑटो रिक्शा वालों को, टैक्सी वालों, ई-रिक्शा वालों को उपहार दिए जाएंगे और उनकी बेटियों की शादी में एक लाख रुपये नकद दिया जाएगा। आम आदमी पार्टी की तरफ से दलित वर्ग के बच्चों को विदेश शिक्षा के लिए पूरा खर्चा सरकार की तरफ से मिलेगा।
तो दिल्ली की धरती पर स्वर्ग उतर आएगा
अब दिल्ली में सरकार किसी की आए। इतनी सारी योजनाओं को जो जनसुविधा के नाम पर दिया जा रहा है, उसके बाद दिल्ली के आम नागरिकों के लिए लेने को और रह ही क्या जाएगा। ऐसे में किसी को किसी तरह का कोई काम करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। ना गरीब महिलाएं बड़े घरों में काम करने जाएंगी, ना ही मर्दों को किसी दुकान या मजदूरी के लिए काम पर जाने की जरूरत पड़ेगी। दिल्ली में ऐसा राम राज्य आ जाएगा कि हर झुग्गी, हर गरीब परिवार यानी हर घर में एक समान जीवन हो जाएगा। दिल्ली की धरती पर स्वर्ग उतर आएगा। यह निष्कर्ष इन राजनेताओं की चुनावी घोषणाओं के निचोड़ से निकलकर आ रहा है। ऐसे में देश के अन्य राज्यों में कोई रहना पसंद ही क्यों करेगा, सब दिल्ली की ओर दौड़ेंगे। दिल्ली की आबादी और बढ़ जाएगी। झुग्गी- झोपड़ी की संख्या भी बढ़ जाएगी। मगर क्या हकीकत में वादे और गारंटी पूरी हो पाएंगे? वादे हैं, वादों का क्या?



