राजनीति

BSP: जानें, मायावती ने अब ईशान को आगे करने का क्यों लिया फैसला; क्या है बसपा की रणनीति

Mayawati: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश (यूपी) की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अब ईशान को आगे करने का फैसला लिया है। 23 सितंबर को पार्टी पदाधिकारियों के साथ मंथन करेंगी।

इसलिए लिया फैसला
मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि आज मेरा पुनः पार्टी के लोगों से यही कहना है कि मेरे खुद के अनुभव को मद्देनजर रखते हुए यदि इनको राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए कुछ करना है तो उन्हें मेरी तरह अपने भाई-बहनों व नजदीकी रिश्ते-नातों आदि के मोह से ऊपर उठकर अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना है, इसीलिए बीएसपी के संस्थापक कांशीराम ने राजनीति में आने के बाद फिर अपने सभी नजदीकी रिश्ते-नातों आदि को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूर रखा है। उन्हें केवल निःस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में कार्य करने की ही इजाजत दी है। बल्कि इन्होंने अपनी पूरी जिंदगी, अपना खुद का परिवार ना बनाकर, बहुजन समाज के हित व कल्याण के लिए ही समर्पित की है। जिनसे प्रेरित होकर फिर मैंने भी उन्हीं के ही पदचिन्हों पर चलने का फैसला लिया और अपनी पूरी जिंदगी बहुजन समाज के लिए समर्पित कर दी है। लेकिन मैं एक लड़की होने की वजह से फिर मजबूरी में मुझे अपने किसी ना किसी भाई-बहिन आदि को हमेशा अपने साथ रखना पड़ा है, जिसके तहत ही मेरा छोटा भाई आनंद कुमार यह पिछले काफी वर्षों से मेरी सेवा में कार्यरत है।

भतीजी से भी किया किनारा
मायावती के मुताबिक, आनंद कुमार के विशेष आग्रह करने पर फिर इनके परिवार में से मुझे इनके बड़े बेटे आकाश आनंद को राजनीति में आगे करना पड़ा है। जिनकी शादी होने के बाद से अब आकाश आनंद का कदम-कदम पर ऐसा रवैया व गतिविधियां आदि रही हैं कि जिसकी वजह से अभी कुछ दिन पहले फिर से इनको पार्टी से अलग भी करना पड़ा है। अर्थात अब वह अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं, जिसे अब पार्टी में वापस लेना यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात ही होगा, जो मैं यह पार्टी विरोधी गलत कार्य कदापि नहीं कर सकती हूं। ऐसे में अब मैं आनंद कुमार के परिवार में से किसको पार्टी में आगे करूं या ना करूं, यह मेरे लिए पिछले कुछ समय से काफी दुविधा सी बनी हुई है, जिस पर विराम देते हुए अब मैंने हर पहलू पर काफी गंभीरता से सोच-विचार करने के बाद यह फैसला लिया है कि इनके परिवार में से ऐसे किसी सदस्य को अब पार्टी में आगे किया जाए, जो आकाश के नक्शेकदम पर बिल्कुल भी ना चले। जहां तक आगे चलकर इनकी बेटी की मदद लेने का सवाल है तो इनकी शादी होने के बाद फिर इनका मामला भी यदि आकाश आनंद की तरह ही निकल गया तो यह भी पार्टी हित में सही नहीं होगा।

अब इनके इस फैसले में कोई भी फेरबदल नहीं किया जाएगा
बसपा प्रमुख के मुताबिक, ऐसी संभावना को भी ध्यान में रखकर अब पार्टी हित में यही उचित होगा कि आकाश आनंद व इनकी बहन को भी अब पार्टी की कोई भी जिम्मेवारी देने से इन दोनों को एकदम दूर रखा जाए अर्थात अब इनके इस फैसले में कोई भी फेरबदल नहीं किया जाएगा। और अब इन दोनों के स्थान पर आनंद कुमार के परिवार में से केवल ईशान आनंद को ही, पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेवारी देकर इनको आगे किया जाएगा, जिसका आकाश आनंद व इनकी बहन की तरह कभी भी कोई चक्कर नहीं रहेगा। अभी तक ऐसा ही लग रहा है। आगे तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है फिर भी यदि इन्होंने पार्टी विरोधी ऐसा कोई भी गंभीर कृत्य किया तो फिर इनको भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा, लेकिन तब ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार में से अन्य किसी भी सदस्य को पार्टी की कोई भी छोटी-बड़ी जिम्मेवारी नहीं दी जाएगी। बल्कि इसके स्थान पर तब फिर पार्टी में ही कार्यरत दलित वर्ग के किसी भी एक मिशनरी व वफादार कार्यकर्ता को ही आगे कर दिया जाएगा। इसलिए देश व जनहित के जरूरी मुद्दों के साथ-साथ इस खास मुद्दे को भी लेकर अब 23 सितंबर की बीएसपी की अत्यंत जरूरी आल इंडिया की बैठक बुलाई गई है, ताकि फिर पार्टी के लोग अपनी पार्टी के कार्यों में पूरे जी-जान से जुट जाएं।

इस पत्र का भी किया जिक्र
अंत में अब मैं यही कहना चाहती हूं कि खासकर परिवार को लेकर पार्टी व मूवमेंट के हित में मैंने यह फैसला कांशीराम से प्रेरित होकर तथा बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर के भी लिखे गए एक पत्र से प्रभावित होकर लिया है, जिस पत्र का सारांश इस प्रकार से है, बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर ने दिनांक 23 फरवरी सन् 1956 को 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइंस, नई दिल्ली से बंबई में अपने पुत्र यशवंत बी. अंबेडकर को पत्र में लिखा है कि मुझे तम्हें सूचित करना है कि उपशम के कई पत्राचार मिले हैं कि तुम उन्हें बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस के एकाउंटेंट व कैशियर के रूप में उनकी ड्यूटी नहीं करने दे रहे हो। तुम्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करके तुम प्रेस को अपने कब्जे में ले लोगे। मैं तुम्हें आगाह कर रहा हूं कि प्रेस पब्लिक प्रापर्टी है, ना तुम्हारा है और ना मेरा, और एक पब्लिक अकाउंट में किसी भी प्रकार की अनियमितता की अनुमति देना संभव नहीं है। तुम्हारा आचरण उचित नहीं रहा है अगर तुमने मेरी अंतिम व फाइनल निर्देश की परवाह नहीं कि तो फिर मैं तुम्हें प्रेस से निकाल-बाहर करूंगा और इस चेतावनी के नहीं मानने पर फिर मैं आपके विरुद्ध अभियोजन भी करूंगा।

कहा, मैं अपने भाई-बहनों आदि के खिलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हूं,
संक्षेप में अब मैं अपने खुद के बारे में भी यही कहना चाहती हूं कि समस्त बहुजन समाज ही मेरा असली परिवार है तथा सत्ता की मास्टर चाबी के जरिये ही उन्हें शोषित से शासक वर्ग बनाकर उनका हित व कल्याण सुनिश्ति करना ही मेरा मिशनरी लक्ष्य व मेरी प्रतिज्ञा भी है, जिसके लिए मैं अपने भाई-बहनों आदि के खिलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हूं, जैसा कि बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर ने उदाहरण पेश किया, यही मेरा भी संकल्प है। सूत्रों के मुताबिक, बसपा की इस रणनीति से पार्टी को फायदा या नुकसान होने का पता आने वाले समय में ही चल सकता है। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button