Dengue: बुखार खत्म होने के बाद भी डेंगू के मरीजों की बिगड़ सकती है तबीयत, रहें सावधान

डेंगू (Dengue) के मरीज बुखार उतरने के बाद अक्सर बेपरवाह हो जाते हैं, जोकि गलत है। ऐसे मरीजों की अचानक तबीयत बिगड़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मरीजों के पेट में तेज दर्द, बीपी में गिरावट, नाक और मुंह से खून आने के जानलेवा लक्षण दिखने लगते हैं। डेंगू में डिहाइड्रेशन और हीमोग्लोबिन का विशेषज्ञ ध्यान रखना चाहिए। प्लेटलेट्स की भी नियमित जांच करानी चाहिए।
मानसून की वापसी के साथ ही डेंगू के मामले बढ़ने लगे
इन दिनों मानसून की वापसी के साथ ही डेंगू के मामले बढ़ने लगे हैं। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में आजकल मरीजों की भीड़ लग रही है। अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों में डेंगू के लक्षण सामने आ रहे हैं। वायरल संक्रमण और बुखार से पसीना बनता है। शरीर में सोडियम व पोटैशियम जैसे तत्वों की कमी से स्थिति गंभीर बन जाती है। रोज कई मरीज ऐसे सामने आ रहे हैं, जिनकी प्लेटलेट 50 हजार तक पहुंच गई है, उन्हें भर्ती कर उपचार शुरू कराया जा रहा है। कई बार मरीज बुखार उतरने पर लापरवाही शुरू कर देते हैं, जबकि अगले दो दिन-तीन तबीयत के लिए बेहद अहम हैं। सिर व पेट में तेज दर्द, थकान, हाथ-पैर के सुस्त पड़ने, उल्टी और दस्त के साथ मसूड़े में खून आने के घातक लक्षण बनते हैं।
48 घंटे होते हैं ज्यादा गंभीर
डेंगू कई दिनों तक रहता है। तीन से पांच दिन बुखार रहता है। इसके बाद के जो 48 घंटे होते हैं, वो ज्यादा गंभीर होते हैं। इसमें प्लेटलेट डाउन हो सकती है। हीमोग्लोबिन घट सकता है। डिहाइड्रेशन हो जाता है। 90 प्रतिशत डेंगू के मरीज सामान्य इलाज से ठीक हो जाते हैं। 10 प्रतिशत को भर्ती करने की आवश्यकता पड़ती है, जबकि एक प्रतिशत मामलों में आइसीयू केयर की जरूरत होती है।
नियमित प्लेटलेट्स की जांच कराए
डेंगू में प्लेटलेट लगातार गिर रहा है और एक लाख से नीचे है, लेकिन बुखार ठीक हो गया है तो ऐसे में नियमित प्लेटलेट्स की जांच करानी चाहिए। डेंगू के मरीज का लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है। मरीज को मनोबल बनाकर रखना चाहिए। डेंगू और सामान्य बुखार के दौरान खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है, जरा सी लापरवाही में जान जा सकती है। तबीयल बिगड़ने पर डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



