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Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने आश्रय गृहों की कमी पर जताई चिंता, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड से मांगी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) से आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की स्थिति में राष्ट्रीय राजधानी में बेघर व्यक्तियों के लिए उपलब्ध आश्रय गृहों के बारे में जानकारी मांगी।

ठंड को लेकर जताई चिंता
न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन ने कहा कि हम चिंतित हैं। बहुत जल्द ठंड बढ़ने वाली है। शीर्ष अदालत ने डीयूएसआईबी से आश्रय गृहों में कितने लोगों को रखा जा सकता है, इसकी संख्या तथा ऐसी सुविधाओं की आवश्यकता वाले लोगों की अनुमानित संख्या बताने को कहा। पीठ ने कहा कि अगर उपलब्ध सुविधाओं में कोई कमी है तो डीयूएसआईबी को यह भी बताना चाहिए कि वह ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या प्रस्ताव रखता है। शीर्ष अदालत शहरी क्षेत्रों में बेघर व्यक्तियों के आश्रय के अधिकार से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी।

दिल्ली में आश्रय गृहों की कुल क्षमता है 17000 व्यक्तियों की
याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में कई आदेश पारित किए हैं और इसे एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आश्रय गृहों की कुल क्षमता केवल 17,000 व्यक्तियों की है और डीयूएसआईबी ने ऐसे नौ आश्रय गृहों को समाप्त कर दिया है। भूषण ने कहा कि समाप्त किए गए इन आश्रय गृहों में लगभग 450 लोग रहते थे, जबकि इनकी क्षमता केवल 286 लोगों की थी।

छह अस्थायी आश्रय गृह 2023 में यमुना नदी में बाढ़ के कारण हो गए थे नष्ट
पीठ ने डीयूएसआईबी के वकील से पूछा कि दिल्ली में आश्रय गृहों की कुल क्षमता कितनी है? वकील ने जवाब दिया कि यह संख्या लगभग 17,000 है तथा अदालत के समक्ष दायर आवेदन केवल छह अस्थायी आश्रयों से संबंधित है। डीयूएसआईबी के वकील ने कहा कि छह अस्थायी आश्रय गृह थे, जो 2023 में यमुना नदी में बाढ़ के कारण नष्ट हो गए थे और जून 2023 के बाद से वहां कोई नहीं रहता। अगर उस क्षेत्र के आस-पास के बेघर लोगों को गीता कॉलोनी स्थित स्थायी आश्रय गृह में स्थानांतरित किया जाता है तो आवेदक को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वकील ने कहा कि पिछली सर्दियों में दिल्ली में ठंड के कारण एक भी मौत की सूचना नहीं मिली थी।

अगली सुनवाई के लिए 17 दिसंबर की तारीख तय
पीठ ने डीयूएसआईबी से एक हलफनामा दायर करने को कहा, जिसमें बेघर लोगों के वास्ते आवास की व्यवस्था के लिए बोर्ड के पास उपलब्ध सुविधाओं सहित अन्य विवरण शामिल हों। पीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 17 दिसंबर की तारीख तय की। सुनवाई के दौरान भूषण ने दावा किया कि डीयूएसआईबी के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ रिश्वतखोरी का आरोप है और इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। पीठ ने कहा कि यह चरित्र हनन के समान है। साथ ही, इस बात पर भी गौर किया कि अधिकारी को इस मामले में आरोपी भी नहीं बनाया गया था।

बेघर लोगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के बारे में ब्योरा मांगा
पीठ ने कहा कि ये आपको कहां से पता चला? भ्रष्टाचार में लिप्त होने, आरोपी बनाए जाने जैसे बेबुनियाद आरोप लगाने से किसी की प्रतिष्ठा पर गंभीर असर पड़ता है। पीठ ने डीयूएसआईबी के वकील से कहा कि वे बेघर लोगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के बारे में ब्योरा दें और बताएं कि क्या वे आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं। पीठ ने सुझाव दिया कि पिछले पांच-छह वर्षों के प्रामाणिक आंकड़ों का औसत लिया जाए। (भाषा)

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