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NOTA: जानें, क्या होता है नोटा, जिसे जम्मू कश्मीर में 1.48 व हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में 0.38 प्रतिशत मतदाताओं ने चुना विकल्प

जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में इस बार हरियाणा (Haryana) की तुलना में अधिक मतदाताओं ने नोटा (NOTA) का प्रयोग किया। निर्वाचन आयोग के नवीनतम आंकड़ों से इसका पता चला है। हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में दो करोड़ से अधिक मतदाताओं में से 67.90 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इनमें से 0.38 प्रतिशत ने वोटिंग मशीन पर इनमें से कोई नहीं (नोटा) विकल्प का इस्तेमाल किया। जम्मू-कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों के लिए तीन चरणों में हुए चुनाव में कुल 63.88 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनमें से 1.48 प्रतिशत ने नोटा का विकल्प चुना। आंकड़ों के अनुसार, दो प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने नोटा विकल्प नहीं चुना। यह इस विकल्प को चुनने वाले मतदाताओं की कम होती संख्या को दर्शाता है।

ऐसे दर्ज करा सकते हैं विरोध
चुनाव में वोट डालते समय अगर आपको लगता है कि कोई भी उम्मीदवार सही नहीं है तो नोटा का बटन दबाकर आप अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं।

जानें, क्यों पड़ी इसकी जरूरत, क्या है इसका मतलब
साल 2009 में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को नोटा का विकल्प उपलब्ध कराने संबंधी मंशा से अवगत कराया था। नोटा की फुल फॉर्म होती है None of the Above यानी मतलब इनमें से कोई नहीं।

ईवीएम में ऐसे हुआ शामिल
नागरिक अधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने भी नोटा का समर्थन कर जनहित याचिका दाखिल कराई। इसके बाद साल 2013 में न्यायालय ने मतदाताओं को नोटा का विकल्प देने का निर्णय किया था। इस प्रकार ईवीएम में एक और विकल्प NOTA शामिल हुआ। नोटा का विकल्प उपलब्ध कराने वाला भारत विश्व का 14वां देश बना।

किन देशों में हैं ये
भारत से पहले नोटा का विकल्प 13 देशों में मतदान के समय जनता के लिए उपलब्ध रहता है, जिनमें अमेरिका, कोलंबिया, यूक्रेन, रूस, बांग्लादेश, ब्राजील, फिनलैंड, स्पेन, फ्रांस, चिली, स्वीडन, बेल्जियम, ग्रीस सहित अब इस लिस्ट में 14 वे नंबर पर भारत भी शामिल है। इनमें से कुछ देश ऐसे भी हैं जहां नोटा को राइट टू रिजेक्ट का अधिकार मिला हुआ है। जिसका मतलब है कि अगर नोटा को ज्यादा वोट मिलते हैं तो चुनाव रद हो जाता है और जो प्रत्याशी नोटा से कम वोट पता है वो दोबारा चुनाव नहीं लड़ सकता है।

यह भी जानें
भारत में नोटा को राइट टू रिजेक्ट का अधिकार प्राप्त नहीं हैं। साल 2013 में नोटा के लागू होने के बाद में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि नोटा के मत केवल गिने जाएंगे पर इन्हे रद मतों की श्रेणी में रखा जाएगा। नोटा का चुनाव के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

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