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Justice Yashwant Verma: नकदी बरामदगी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से कहा, आपका आचरण विश्वसनीय नहीं है, आप समिति के समक्ष क्यों पेश हुए?

उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने नकदी बरामदगी मामले में आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट को अमान्य करार देने का अनुरोध करने वाले न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आचरण को विश्वसनीय न बताते हुए बुधवार को उनसे तीखे सवाल पूछे।

रिपोर्ट में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को पाया गया था कदाचार का दोषी
गौरतलब है कि आंतरिक समिति की रिपोर्ट में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को कदाचार का दोषी पाया गया था।

जानें, क्या है मामला
इस मामले की शुरुआत 14 मार्च 2025 को हुई, जब न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के दिल्ली आवास पर आग लगने के दौरान दमकल कर्मियों ने कथित तौर पर जले हुए नोट बरामद किए। इसके बाद तत्कालीन सीजेई संजीव खन्ना ने तीन सदस्यीय समिति गठित की। समिति ने तीन मई को अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें वर्मा के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाले गए। सीजेआई ने इसे राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को भेजकर महाभियोग की सिफारिश की। सुनवाई के दौरान वकील मुकुल रोहतगी ने मामले को अगले सप्ताह तक टालने की मांग की, लेकिन जस्टिस दत्ता ने तुरंत सुनवाई शुरू करने का फैसला किया। कपिल सिब्बल ने बेंच को बताया कि उन्होंने संवैधानिक मुद्दों पर बिंदु तैयार किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल से समिति की रिपोर्ट और एक पेज का नोट जमा करने को कहा, जिसमें मुख्य दलीलें हों।

कौन हैं न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा, जिनके घर से मिली थी करोड़ों की नकदी
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का जन्म छह जनवरी 1969 को इलाहाबाद में हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बीकॉम (ऑनर्स) की पढ़ाई की। मध्य प्रदेश के रीवा विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ एक रिपोर्ट आने के बाद उन्हें उनके मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र सरकार को उनके स्थानांतरण की सिफारिशें कीं। न्यायमूर्ति वर्मा ने अक्टूबर 2021 में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

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