Himachal News: सेवानिवृत्त कर्नल और उनकी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट कर 49 लाख रुपये ठगे, जानें क्या है डिजिटल अरेस्ट, कैसे बचें

Hamirpur News: देश में डिजिटल अरेस्ट की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पुलिस डाल-डाल तो अपराधी पात-पात। नित ठगी की ऐसी वारदातें सामने आ रही हैं। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में साइबर अपराधियों ने भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त कर्नल और उनकी पत्नी को कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट कर उनसे 49 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
ऐसे की ठगी
शिकायतकर्ता को वाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को मुंबई अपराध शाखा का अधिकारी बताया। जालसाज ने दावा किया कि सेवानिवृत्त अधिकारी के आधार कार्ड का इस्तेमाल चार सिम खरीदने और मुंबई में एक बैंक खाता खोलने के लिए किया गया था। इसके बाद सेवानिवृत्त कर्नल और उनकी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट कर 49 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जानें, क्या है डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर स्कैम है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम में फोन करने वाले कभी पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स, आरबीआई और दिल्ली या मुंबई पुलिस अधिकारी बनकर आत्मविश्वास से बात करते हैं। वाट्सएप या स्काइप काल पर जब कनेक्ट करते हैं तो आपको फर्जी अधिकारी एकदम असली से लगते हैं। वे लोग पीड़ित इमोशनली और मेंटली टार्चर करते हैं।
यकीन दिलाते हैं कि उनके सा उनके परिजन के साथ कुछ बुरा हो चका है या होने वाला है। सामने बैठा व्यक्ति पुलिस की वर्दी में होता है, ऐसे में ज्यादातर लोग डर जाते हैं और उनके जाल में फंसते चले जाते हैं। डिजिटल अरेस्ट में फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को डरा-धमकाकर उनसे बड़ी रकम वसूली जाती है।
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें
सतर्क रहे, सुरक्षित रहेंः कोई भी सरकारी जांच एजेंसी आधिकारिक संचार के लिए वाट्सएप या स्काइप जैसे प्लेटफार्म्स का उपयोग नहीं करतीं, जबकि आनलाइन ठग इन्हीं का इस्तेमाल कर रहे हैं। शुरुआत में शक होने पर तुरंत फोन काट दें। फोन पर लंबी बातचीत करने से बचें।
इग्नोर करेंः साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट के लिए पीड़ितों को फोन काल, ई-मेल से संदेश भेजते हैं। बताते हैं कि आप मनी लांड्रिंग या चोरी जैसे अपराधों के तहत जांच के दायरे में हैं। ऐसे किसी काल और ई-मेल पर ध्यान न दें।
घबराएं नहींः साइबर ठग काल पर बातचीत के दौरान गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की धमकी देते हैं। उनकी बातचीत और फर्जी तर्कों से घबराहट हो सकती है, लेकिन घबराना नहीं है। न ही बैंक डिटेल व यूपीआई आईडी शेयर करनी है।
जल्दबाजी करने से बचेंः काल या वीडियो काल पर ठगों के सवालों और तर्कों का जवाब देने में जल्दबाजी न करें। शांत रहें, सिर्फ सुनें। अनजान नंबरों से आए सामान्य और वीडियो काल पर भी कोई निजी जानकारी न दें।
साक्ष्य जुटाएंः काल के स्क्रीनशाट या वीडियो रिकार्डिंग सेव करें, ताकि आवश्यक होने पर उपयोग कर सकें।
फिशिंग से बचेंः काल के अलावा ई-मेल के जरिए ऐसे संदेश भेजे जा रहे हैं, जो अविश्वसनीय लगते हैं, ये फिशिंग के मामले हैं। इसमे ठग आपके कंप्यूटर तक पहुंचकर व्यक्तिगत जानकारी चुराते हैं।
धोखाधड़ी को रिपोर्ट करेंः किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या वेबसाइट cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें। ऐसे करने से आप डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से बच सकते हैं। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)


