Stubble Burning: जानें, क्या है पराली, किसान क्यों जलाते हैं इसे; क्या है इसका स्थायी समाधान

पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाएं खासकर पंजाब और हरियाणा में थम नहीं रही हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पराली जलाने के मामले में उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाने को लेकर हरियाणा और पंजाब सरकारों को बुधवार को फटकार लगाई तथा दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को 23 अक्टूबर को उसके समक्ष पेश होकर स्पष्टीकरण देने को कहा। न्यायमूर्ति अभय एस ओका, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने पर हरियाणा और पंजाब सरकार के अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को निर्देश दिया।
जानें, क्या है पराली, किसान क्यों जलाते हैं इसे
पराली धान, गेहूं और कुछ अन्य अनाज की फसलों की कटाई के बाद बचा हुआ फशल अवशेष होता है। इसे सड़ने में काफी समय लगता है। पराली के कारण अगली फसल के लिए बीज बोना मुश्किल हो जाता है, फसल चक्र में गड़बड़ी पैदा होती है।
पराली जलाने से पर्यावरण पर क्या पड़ता है प्रभाव
पराली जलाने से पर्यावरण पर कई हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं। इससे जहरीली गैसें निकलती हैं, जो न केवल आस-पास के निवासियों के लिए सांस लेना मुश्किल बनाती हैं बल्कि ग्लोबल वार्मिंग में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। पराली जलाना वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है। पराली जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है। पराली जलाने से अतिरिक्त कार्बन और उससे पैदा होने वाली गर्मी मिट्टी की उर्वरता को कम करती है और मिट्टी का कटाव बढ़ाती है।
पराली जलाने के क्या हैं विकल्प
पराली को जलाने के बजाय कई अन्य कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। पराली को उपचारित करके जैव ईंधन या पार्टिकल बोर्ड बनाया जा सकता है। उपचार के बाद इसका इस्तेमाल मवेशियों के चारे, कम्पोस्ट खाद, छत, पैकेजिंग और कागज के लिए भी किया जा सकता है। पराली को पशु चारे के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। इस संबंध में किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसके बावजूद किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



