सुनो सरकार

Suno Sarkar: गरीबों के राशन में घटतौली, कब रुकेगी कोटेदारों की मनमानी?

राशन वितरण (Ration Distribution) में कोटेदारों की घटतौली थमने का नाम नहीं ले रही है। कोटे की दुकानों पर राशन तौलने के लिए वेइंग मशीन दी गई थी। इससे राशन कार्ड पर लाभार्थियों को लाभ देने का दावा किया गया था। मगर कोटेदार वेइंग मशीन से राशन न तौलकर अब भी दूसरे कांटे पर या तराजू से राशन तौलकर कार्डधारकों को दे रहे हैं। पांच की जगह चार किलो गेहूं या चावल ही बंट रहा है। भारत में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के प्रताप विहार में कोटेदार इसी तरह मनमानी कर रहे हैं। विरोध करने पर गुंडई पर उतर आते हैं।

एक क्विंटल राशन वितरित पर कोटेदारों को 90 रुपये कमीशन के रूप में मिलता है। लेकिन उस कमीशन से भी उन्हें संतोष नहीं है। दावा किया गया था कि वेइंग मशीन से राशन वितरण में घटतौली रुकेगी। लेकिन कोटेदारों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। कोटेदार पहले से ही राशन तौलकर रख लेते हैं। वेइंग मशीन पर उतना राशन तौलकर पर्ची निकालकर अपने पास रख लेते हैं। फिर दूसरे कांटे पर कम राशन तौलकर कार्डधारकों को देते हैं।

ई-पॉश मशीन पर अंगूठा लगाने के बाद वेइंग मशीन पर राशन रखने पर ई-पॉश मशीन से पर्ची निकलती है। उतना ही राशन कार्डधारकों को देने का नियम है। लेकिन कोटेदार न तो यूनिट के हिसाब से राशन देते हैं। न ही पर्ची देते हैं, जबकि ई-पॉश मशीन से पर्ची निकलती है। उतना ही राशन कार्डधारकों को देने का नियम है। कार्डधारकों की ओर से इस बात का विरोध किए जाने पर कोटेदार उनका राशन कार्ड कटवा देने की धमकी देते हैं।

गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2024 में अपने बजट भाषण में बताया था कि मुफ्त राशन योजना पर चालू वित्त वर्ष में दो लाख करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। नरेंद्र मोदी सरकार ने नवंबर, 2023 में ही घोषणा कर दी थी कि इस योजना को अगले पांच साल तक यानि 2028 तक जारी रखा जाएगा।

वित्त मंत्री के बजट अनुमान को आधार बनाया जाए तो इस योजना से सरकारी खजाने का बोझ तकरीबन 10 लाख करोड़ रुपये होता है। इस योजना को जून 2020 में शुरू किया गया था, इसके बाद से इसकी समय सीमा को कई बार आगे बढ़ाया गया है। अब इसकी डेडलाइन दिसंबर 2028 तक बढ़ाई गई है। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

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