Cyclone: जानें, कब और क्यों आते हैं चक्रवात, कैसे तय होते हैं इनके नाम, ऐसे करें बचाव

Cyclone Montha: चक्रवात यानी साइक्लोन शब्द ग्रीक भाषा के साइक्लोस से लिया गया है, जिसका अर्थ है सांप की कुंडलियां। चक्रवात कुछ दिन या कुछ हफ्ते तक रह सकता है। चक्रवात जहां पहुंचता है वहां तेज हवाएं और बारिश होती है। चक्रवात मोंथा के कारण मंगलवार से शुक्रवार तक पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने एक विशेष बुलेटिन में कहा कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर स्थित मौसम प्रणाली के एक गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील होने और मंगलवार रात को आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के पास पहुंचने की संभावना है।
जानें, क्या होता है चक्रवात
चक्रवात शक्तिशाली मौसम प्रणालियां हैं, जो निर्मित और प्राकृतिक वातावरण को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ये उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में गर्म महासागरों के ऊपर विकसित होने वाले निम्न दाब प्रणालियों से उत्पन्न होते हैं। कई दिनों में तीव्र हो जाते हैं, जिससे तेज हवाएं, तेज बारिश और बाढ़ आती है।
क्यों आते हैं चक्रवात
सर्कुलर स्टॉर्म यानी गोलाकार तूफान को चक्रवाती तूफान कहा जाता है। ये तूफान गर्म समुद्र के ऊपर बनते हैं। हर तरह के साइक्लोन बनने के लिए समुद्र के पानी के सरफेस का तापमान 25-26 डिग्री के आसपान होना जरूरी होता है। यही वजह है कि साइक्लोन अधिकतर गर्म इलाकों में ही बनते हैं। समुद्र का तापमान बढ़ने पर उसके ऊपर मौजूद हवा गर्म और नम हवा होने की वजह से हल्की हो जाती है और ऊपर उठती है। जैसे-जैसे ये हवाएं ऊपर की तरफ जाती हैं, इनके नीचे की तरफ कम दबाव वाला क्षेत्र बनता है। जैसे-जैसे आसपास की हवाओं से कम दबाव वाले क्षेत्र प्रेशर बढ़ता है यह चक्रवात की शक्ल लेने लगता है। समुद्र में ये गोलाकार तूफान एकदम कुंडली मारकर बैठे सांप की तरह नजर आते हैं, इस कारण इन्हें साइक्लोन कहा जाता है।
कब शुरू हुआ चक्रवात को नाम देने का सिलसिला
अटलांटिक क्षेत्र में चक्रवाती तूफानों के नाम तय करने की प्रथा 1953 में शुरू हुई। तब अमेरिका में राष्ट्रीय तूफान केंद्र द्वारा तैयार की गई सूचियों में से तूुफान के नाम रखे जाते थे और ये नाम मनमाने ढंग से रखे जाते थे। हिंद महासागर क्षेत्र में इसकी शुरुआत 2004 में हुई। द वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन साल 1972 में उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवात की चेतावनी और आपदा की रोकथाम के लिए पैनल ऑन ट्रॉपिकल साइक्लोन्स की स्थापना की थी। शुरुआत में इसके आठ सदस्य भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका, ओमान और थाईलैंड थे। साल 2018 में इसका विस्तार हुआ और इसमें अन्य सदस्य भी शामिल हो गए।
कैसे तय होते हैं इनके नाम
संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड मेट्रोलाजिकल आर्गेंनाइजेशन ने कुछ नियम तय किए हैं। इसके हिसाब से हिंद महासागर के जिन क्षेत्रों में तूफान आएगा, उनका नामकरण वहां की क्षेत्रीय एजेंसियां करेंगी। उसी तूफान का नामकरण होता है, जिसकी गति कम से कम 63 किलोमीटर प्रति घंटा हो। हिंद महासागर क्षेत्र के तूफान के नाम 13 देश बारी-बारी रखते हैं। अप्रैल 2020 में पीटीसी ने चक्रवाती तूफान 169 नाम वाली एक लिस्ट जारी की। इसमें हर देश ने 13-13 नाम सुझाए थे। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कोई साइक्लोन आता है, तो इन्हीं 169 नाम की लिस्ट से तूफान का नाम रखा जाता है।
चक्रवात से ऐसे करें बचाव?
-चक्रवात आए तो घबराए नहीं, घर में फर्स्ट एड का इंतजाम रखे। जरूरी दवाएं, बैंड-ऐड, हैंड सैनिटाइजर्स, मास्क, हेलमेट, सीजर, कैंडल, एक्स्ट्र बैटरीज के अलावा कुछ कैश भी अपने पास रख लें।
-साइक्लोन अलर्ट आते ही बिजली का मेन स्विच ऑफ कर दें। गैस भी बंद कर दें। दरवाजो और खिड़कियां बंद कर दें। घर में अगर ढीली टाइल, दरवाजे और कांच की खिड़कियां हों तो उन्हें बदल दें। अगर कांच की खिड़कियां या दरवाज़े हों तो शटर डोर का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर शटर ना हो तो प्लाई उड का इस्तेमाल कर सकते हैं।
-किसी भी तरह के संक्रमण से बचने के लिए उबला हुआ या क्लोरीनयुक्त पानी पिएं। टूटे हुए बिजली के खंभों और तारों या अन्य नुकीली वस्तुओं से सावधान रहें।
-हर अलर्ट पर चौकस रहें। मोबाइल फोन पूरी तरह चार्ज रखें। मिट्टी के तेल से भरी लालटेन, बैटरी से चलने वाली टॉर्च, पर्याप्त ड्राई सेल और ट्रांजिस्टर के लिए अतिरिक्त बैटरी रखें. अपने दस्तावेजों और क़ीमती सामानों को वाटरप्रूफ पैकेजिंग में सुरक्षित करें।
-रेडियो या ट्रांजिस्टर सुनते रहें। केवल उसी माध्यम की जानकारी पर भरोसा करें जो अधिकृत हों।
-जितनी जल्दी हो सके बीमारियों के खिलाफ टीका लगवाएं। अगर गाड़ी चलानी पड़े तो सावधानी से चलाएं। आपके परिसर में अगर मलबा हो तो तुरंत साफ करें। किसी भी प्रकार के नुकसान और खतरे की आशंका की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
-कई बार ऐसा होता है कि चक्रवात में ज्यादा बारिश के चलते लोग अपनी कार समेत फंस जाते हैं। ऐसे वक्त में तुरंत अपनी कार के खिड़की-दरवाजे खोल लें। क्योंकि अगर एक बार पानी ज्दाया बढ़ गया, तो वो इतना दबाव बना देगा कि आपको कार से निकलने का मौका नहीं मिलेगा।
-चक्रवात के बारे में अफवाहों और गलत सूचनाओं के झांसे में न आएं। राहत बचाव दल के सुझाव को नजरअंदाज न करें। निचले समुद्र तटों या उन स्थानों पर न जाएं, जो ऊंची लहरों की जद पर आते हों।
-किसी भी जर्जर मकान में शेल्टर ना लें। अगर आपका घर किसी भी वजह से सेफ नहीं है, तो भी चक्रवात आने से पहले ही उसे छोड़ कर निकल जाएंं। अगर आप शेल्टर होम में हैं तो तब तक वहीं रहें, जब तक कि संबंधित अधिकारी आपको लौटने के लिए ना बोले।
-जब हवाएं शांत होती दिखें, तब भी बाहर न निकलें। हवा कभी भी तेज हो सकती है। कभी-कभार बारिश के चलते हवा धीमी हो जाती है। चक्रवात के दौरान हवा की दिशा बदलना आम बात है। अज्ञानता के चलते कभी भी इनकी चपेट में आ सकते हैं। चक्रवात के दौरान अपने ईश्वर का स्मरण करें। घबराएं नहीं, धैर्य बनाएं रखे। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



