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Form 6: जानें, फॉर्म-6 पर क्यों मचा घमासान, किसने-क्या कहा

Election Commission: फॉर्म-6 में बदलाव पर जहां एक ओर घमासान जारी है, वहीं दूसरी ओर राजनीति गरमाने लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि उसने अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। फॉर्म-6 एक ऐसा आवेदन है, जिसके जरिए कोई पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करने की मांग करता है।

फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया, इसके साथ संलग्न घोषणा पत्र को न्यायालय की मंजूरी: आयोग
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ा आदेश जारी करते समय उसके साथ एक घोषणापत्र संलग्न किया गया था, जिसे शीर्ष अदालत ने बरकरार रखा था। आयोग की यह टिप्पणी सुप्रीम को्रट के यह कहने के कुछ घंटे बाद आई है कि उसने फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।

जानें, क्या है मामला
निर्वाचन आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, बिहार में 24 जून 2025 को एसआईआर संबंधी आदेश जारी करते समय फॉर्म-6 के साथ एक घोषणापत्र संलग्न किया गया था, जिसे शीर्ष अदालत ने 27 मई के आदेश में बरकरार रखा था। विज्ञप्ति में आयोग ने कहा था कि “एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणापत्र को माननीय उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। उसने कहा था कि एसआईआर की अवधि के अलावा सामान्य अवधि में नियमों (मतदाता पंजीकरण नियम 1960) के अनुसार लागू होने वाले फॉर्म का ही इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बाद आयोग ने अपने ऑनलाइन पोर्टल से वह घोषणापत्र वापस ले लिया था, जिसमें एसआईआर के तहत पंजीकरण के लिए आवेदक के माता-पिता की जानकारी मांगी गई थी। फॉर्म-6 और घोषणापत्र के ऑनलाइन संस्करण में दोनों दस्तावेज के लिए सिर्फ एक बार वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) मांगा जाता था, न कि दो बार। इससे यह संदेश गया कि घोषणापत्र फॉर्म-6 का ही एक अहम हिस्सा था।

जानिए, किसने, क्या-कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूचियों के एसआईआर के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने कहा कि हमने फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। यह बात साफ होनी चाहिए। जब ​​रिकॉर्ड पेश किए जाएंगे, तो हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन दावों को खारिज कर दिया कि उसने 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति अपनी वेबसाइट से हटा ली है। आयोग ने यह बताने के लिए प्रेस विज्ञप्ति का लिंक साझा किया कि वह घोषणा अभी भी उपलब्ध है।

कांग्रेस सीईसी ने संविधान से किया विश्वासघात, फॉर्म-6 में किया अवैध बदलाव
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर संविधान के साथ विश्वासघात किया और मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव भी किया। मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के प्रति जनता का विश्वास बहाल करने का उच्चतम न्यायालय के पास यह महत्वपूर्ण अवसर है।

राहुल गांधी बोले, साबित हुआ कि सीईसी ने फॉर्म-6 में अवैध तरीके से किया बदलाव
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा तरीके से बदलाव किए और यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मदद पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग का एक और सबूत है। राहुल गांधी ने 26 सितंबर की निर्वाचन आयोग के एक प्रेस नोट का हवाला देते हुए एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अब यह संदेह से परे स्थापित हो चुका है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा तरीके से बदलाव किया।

आप नेता मनीष सिसोदिया ने फॉर्म-6 में बदलाव पर खड़े किए सवाल
आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया ने निर्वाचन आयोग द्वारा फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने इन परिवर्तन के लिए उच्चतम न्यायालय से अनुमति नहीं ली थी और शीर्ष अदालत ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि उसने ऐसे किसी बदलाव की मंजूरी नहीं दी है। सिसोदिया ने यहां कहा कि उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि ज्ञानेश कुमार को फॉर्म-6 में बदलाव की अनुमति नहीं मिली थी। फॉर्म-6 पर सियासी घमासान जारी है। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

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