Arrested: शादी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, कई गिरफ्तार

Fraud: दिल्ली पुलिस ने शादी के लिए जीवनसाथी की तलाश कर रहे पुरुषों को ठगने वाले एक बड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है। आगरा से संचालित इस गिरोह का सरगना 29 वर्षीय एक वकील निकला, जो फर्जी प्रोफाइल, शादी की इच्छुक महिलाओं से बातचीत कराने और बार-बार भुगतान की मांग के जरिए ठगता था। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
शादी पार्टनर नाम से फर्जी वैवाहिक सेवा संचालित करता था
पुलिस ने बताया कि अमित कुमार शादी पार्टनर नाम से फर्जी वैवाहिक सेवा संचालित करता था और उसने जानबूझकर प्रत्येक पीड़ित से ठगी की रकम 15,000 रुपये तक सीमित रखी थी। इसका मकसद लोगों को शिकायत दर्ज कराने से हतोत्साहित करना था। पुलिस उपायुक्त (मध्य) रोहित राजबीर ने बताया कि फर्म का पंजीकरण एमएसएमई और उत्तर प्रदेश श्रम विभाग में भी कराया गया था तथा इसके नाम पर बैंक खाते और सिम कार्ड भी लिए गए थे। पुलिस ने एक शिकायतकर्ता की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे एक वेबसाइट के जरिए झांसा दिया गया और पंजीकरण, प्रोफाइल तक पहुंच, इसे सक्रिय करने तथा संपर्क कराने के शुल्क के नाम पर उससे 15,000 रुपये ठग लिए गए।
ऐसे हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने बताया कि शिकायत की जांच के दौरान उस चालू खाते का पता चला, जो एमएस शादी पार्टनर कॉम के नाम पर पंजीकृत था और जिसमें ठगी की रकम जमा की गई थी। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के डेटाबेस के विश्लेषण से पता चला कि यह खाता देश के अलग-अलग हिस्सों से मिली छह शिकायतों से जुड़ा था, जिनमें इसी तरह से ठगी किए जाने की बात सामने आई थी। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस की एक टीम ने चार सितंबर को आगरा के एक अपार्टमेंट में कॉल सेंटर पर छापा मारा और कागजों में फर्म की मालिक 44 वर्षीय महिला को गिरफ्तार कर लिया। आठ महिला टेली-कॉलर को भी हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान महिला ने कथित तौर पर इस गिरोह के संचालन में कुमार की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
खुद को फर्म का कानूनी सलाहकार बताया था
पुलिस के अनुसार, अमित कुमार ने ठगी से खुद को दूर रखने के लिए एक जटिल व्यवस्था बनाई थी। उसने महिला के नाम पर एमएस शादी पार्टनर कॉम नाम से प्रोपराइटरशिप फर्म शुरू की और नेटनेक्सिस सॉल्यूशंस (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के साथ फ्रेंचाइजी समझौता किया। पुलिस ने बताया कि अमित कुमार ने खुद को फर्म का कानूनी सलाहकार बताया था, जिससे वह यह दावा कर सके कि वह केवल कानूनी सेवाएं दे रहा था और कॉल सेंटर के संचालन के लिए जिम्मेदार नहीं था। पुलिस ने बताया कि छापे की जानकारी मिलने के बाद कुमार ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए और कहीं छिप गया। तकनीकी निगरानी की मदद से जांचकर्ताओं ने उसका पता आगरा में लगाया।
शादी के लिए दुल्हन की तलाश कर रहे पुरुषों को निशाना बनाता था
पुलिस ने बताया कि आठ सितंबर को आगरा के कला कुंज इलाके में एक वाहन से जा रहे कुमार को रोका गया। अमित कुमार ने उत्तर प्रदेश राज्य विधिज्ञ परिषद के अपने दस्तावेज दिखाए और दावा किया कि वह केवल कानूनी सलाहकार है। हालांकि, जांचकर्ताओं ने उसके सामने ऐसे डिजिटल साक्ष्य रखे, जो कथित तौर पर उसे इस पूरे संचालन से जोड़ते थे। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह करीब एक साल से सक्रिय था और खास तौर पर शादी के लिए दुल्हन की तलाश कर रहे पुरुषों को निशाना बनाता था। आरोपियों ने अपनी वेबसाइट के अलावा सोशल मीडिया पर वैवाहिक मेलजोल से जुड़े पेज, समूह और टिप्पणियों से शादी के इच्छुक लोगों के संपर्क नंबर हासिल किए।
इनकी भी हुई गिरफ्तारी
जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि गिरोह कथित तौर पर उन पीड़ितों को पैसे वापस कर शिकायत करने से रोकने की कोशिश करता था, जो पुलिस से संपर्क करने की तैयारी में दिखते थे। अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान सात डेस्कटॉप कंप्यूटर के सीपीयू, 47 मोबाइल फोन, जिनमें टेली-कॉलर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सामान्य कीपैड फोन भी शामिल हैं, 50,000 रुपये नकद और एक एसयूवी बरामद की गई।पुलिस ने बताया कि कॉल सेंटर से जब्त तकनीकी डेटा और डिजिटल उपकरणों से संकेत मिलता है कि पीड़ितों की संख्या हजारों में हो सकती है। गिरफ्तार महिला कथित तौर पर कागजों में फर्म की मालिक और इसके संचालन की प्रबंधक थी, जबकि गिरफ्तार की गई अन्य महिलाओं की उम्र 21 से 32 वर्ष के बीच है और वे कथित तौर पर मुख्य टेली-कॉलर के रूप में काम करती थीं। (भाषा)



