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Sonam Wangchuk Hunger Strike: जानें, सोनम वांगचुक के अनशन पर किसने-क्या कहा?

Sonam Wangchuk: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बुधवार को अपनी भूख हड़ताल के 18वें दिन भी लगातार चिकित्सकीय निगरानी में हैं। वह दिल्ली में जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है।

सरकार कॉजपा के प्रदर्शनकारियों से बात करे और वांगचुंक को अनशन खत्म करना चाहिए: शशि थरूर
शशि थरूर ने कहा कि केंद्र सरकार को प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करना कमजोरी नहीं, बल्कि राजनीतिक सूझबूझ (स्टेटमैनशिप) का परिचायक होगा। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 25 दिन से अधिक समय से प्रदर्शन कर रही है।

वांगचुक को कुछ हुआ तो केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी: साकेत गोखले
तृणमूल कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर कहा कि पिछले 18 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अगर कुछ भी हुआ तो इसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी। उन्होंने शिक्षा मंत्री प्रधान से कॉजपा (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत शुरू करने की भी अपील की।

सोनम वांगचुक के अनशन की अनदेखी कर सरकार क्रूरता कर रही : अभिजीत दीपके
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत नहीं करने को लेकर सरकार को क्रूर बताया।कॉजपा का मेडिकल की प्रवेश परीक्षा नीट में कथित अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन बुधवार को 26वें दिन में प्रवेश कर गया। कॉजपा की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक अभी भी बहुत कमजोर हैं और लगातार चिकित्सकीय निगरानी में हैं।

सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य से जुड़ी याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह यहां जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताने वाली जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा।

जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं के नाम शशि थरूर ने लिखा पत्र
कांग्रेश नेता शशि थरूर ने सोशल मीडिया एक्स पर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं के नाम एक खुला पत्र लिखा है। पत्र में शशि थरूर ने लिखा है मेरे प्यारे युवा दोस्तों, आज मैं आपसे एक राजनेता या सांसद के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर बात कर रहा हूं, जो युवा भारतीयों की आपकी पीढ़ी के साथ हो रही घटनाओं से बहुत परेशान है। यह मामला मेरे लिए व्यक्तिगत है। मेरा जन्म एक मध्यम-वर्गीय परिवार में हुआ था। मेरे पिता अखबार में नौकरी करते थे, मां गृहिणी थीं, और एक ही कमाई से तीन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई होती थी। हमारे जैसे परिवार के लिए, मेरिट (योग्यता) कोई नारा नहीं था। स्कॉलरशिप, निष्पक्ष परीक्षाएं, ईमानदार नतीजे — यही एकमात्र तरीका था जिससे एक वेतन से तीन बच्चों के सपने पूरे हो सकते थे।

मैंने मुंबई और कोलकाता में स्कूल की पढ़ाई की, दिल्ली में कॉलेज किया, यूनिवर्सिटी में टॉप किया और आईआईएम में दाखिला पाया, लेकिन मैंने स्कॉलरशिप पर अमेरिका जाकर अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपने जुनून को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। मुझे विरासत में कुछ नहीं मिला; सब कुछ कड़ी मेहनत और हाँ, परीक्षाओं के जरिए हासिल किया। इसलिए मैं जानता हूं कि कम और मध्यम आय वाले परिवारों के युवाओं के लिए निष्पक्ष, मेरिट-आधारित सिस्टम ही आगे बढ़ने की एकमात्र सीढ़ी है। जब वह सीढ़ी टूट जाती है, पेपर लीक हो जाते हैं, परीक्षाएं रद्द हो जाती हैं, भरोसा टूट जाता है, तो अमीर और ताकतवर लोगों के बच्चों को नुकसान नहीं होता। उनके पास दूसरी सीढ़ियां होती हैं। यह आपके सपने और आपके परिवारों के त्याग (और दुखद रूप से, कुछ घरों में, खुद युवाओं की जान) के साथ धोखा होता है।

जंतर-मंतर पर जमा हुए युवाओं और पूरे भारत में शांति से अपनी आवाज उठाने वालों से यह देश आपकी बात सुन रहा है। आपका गुस्सा अनुशासनहीनता नहीं है, यह उस पीढ़ी का दर्द है जिसने सब कुछ सही किया और फिर भी उसे धोखा मिला। आप अकेले नहीं हैं। चुपचाप देख रहे लाखों युवा भारतीयों से, आपकी पीढ़ी कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसे बस मैनेज किया जाए। आप भारत के भविष्य का जवाब हैं। उम्मीद न छोड़ें। यह सीढ़ी फिर से बनाई जाएगी आपके द्वारा और हर उस भारतीय द्वारा जो आपके साथ खड़ा है।

सोनम वांगचुक से की ये अपील
सोनम वांगचुक से मेरी दिली अपील है। कृपया अपना अनशन खत्म करें। आपने देश की अंतरात्मा को जगाया है, अनशन का मकसद यही होता है। आगे के लंबे सफर के लिए भारत को आपकी आवाज की जरूरत है। सोमवार से संसद का सत्र फिर शुरू हो रहा है, इसलिए हमें लोकतंत्र के सबसे बड़े मंच पर छात्रों के मुद्दों को उठाने का मौका मिलेगा। समस्या का समाधान वहीं होना चाहिए, न कि आमरण अनशन से। कृपया मेरी गुजारिश पर ध्यान दें।

सरकार से किया ये आग्रह
और आखिर में सरकार से: मैं आपसे सम्मानपूर्वक आग्रह करता हूं कि आप आगे आएं और उस बातचीत में शामिल हों, जिसकी हमारे लोकतंत्र को अपने युवा नागरिकों से जरूरत है। यह कमजोरी नहीं, बल्कि राजनेताओं वाली समझदारी है। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

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