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Suno Sarkar: बेतरतीब विकास गले की फांस, कैसे मिले निजात

बेतरतीब विकास (Haphazard Evolution) शहरों में नहीं बल्कि गांवों में भी गले की फांस बन गया है। द्रुतगति से हुए विकास ने शहरों को प्रदेश में ऊंचे स्थान पर तो स्थापित कर दिया, लेकिन अनियोजित विकास ने शहरवासियों और ग्रामीणों के सामने कई परेशानी खड़ी कर दी हैं। विभागों के बीच समन्वय नहीं होने का खामियाजा उन्हें उठाना पड़ रहा है। हालत इसी से समझे जा सकते हैं कि कुछ मिमी वर्षा होते ही सड़कें तालाब बन जाती हैं। सड़कों पर बेतरतीब तरीके से वाहन पार्क होते हैं। वजह है कि हमारे पास पार्किंग को लेकर कोई योजना ही नहीं है। नगर निगम ने पार्किंग के नाम पर बेसमेंट तो स्वीकृत किए, लेकिन यह देखने की फुर्सत किसी के पास नहीं है कि इनमें वाहन पार्क होने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन यह कैसे नियंत्रित होगी। किसी को नहीं पता। पांच वर्ष में शहर में वाहनों की संख्या लगभग दोगुना हो चुकी हैं, लेकिन इन वाहनों को पार्क करने के लिए स्थान सिकुड़ गए।

अवैध कालोनियों को वैध कर पाना संभव ही नहीं
शहर में कई अवैध कालोनियां हैं। जिन्हें वैध कर पाना संभव ही नहीं है। वजह है कि ये कालोनियां सरकारी, नजूल, कांकड की भूमि पर वर्षों पहले बसी थीं। कुछ कालोनियां विकास प्राधिकरण की जमीन पर बसीं हैं। इन कालोनियों के बसते वक्त न तो नगर निगम ने बसाहट रोकने की कोशिश की और न ही जिला प्रशासन ने। अवैध कालोनियों में हुआ अनियोजित विकास सिर्फ एक कालोनी को नहीं बल्कि आसपास की वैध कालोनियों को भी प्रभावित करती हैं। अवैध कालोनियों में न जल निकासी का कोई इंतजाम है और न चौड़ी सड़कें। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

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