UP Politics: अखिलेश यादव का आरोप, भाजपा ने शिक्षा को रद्दी कर दिया

UP News: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को भाजपा पर जमकर निशाना साधा। अखिलेश ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि भाजपा ने शिक्षा को रद्दी कर दिया है।
पांच साल के भाजपा शासनकाल में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हुए
उनके मुताबिक, भाजपा सरकार ने पहले उप्र में विलय के नाम पर 27000 सरकारी स्कूलों को बंद करने की साजिश की थी और अब राज्यसभा में शिक्षा-विरोधी भाजपा सरकार ने ये स्वीकार किया है कि पिछले पांच साल के भाजपा शासनकाल में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। ये हमारे देश के भविष्य के विरुध्द एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है। क्या भाजपाई और उनके संगी-साथी ये चाहते है कि अमीरों के बच्चे तो पढ़ें लेकिन पीडीए समाज के शोषित-वंचित बच्चे नहीं और पीडीए समाज के बच्चे श्रमिक-मजदूर बनकर ही रह जाएं।
बच्चों से शिक्षा-तालीम का अधिकार छीनना, सामाजिक अपराध है
भाजपा की शिक्षा विरोधी सोच ही किताब नहीं बंटवा रही है, सरकारी स्कूलों को बंद करवा रही है। भाजपाई जानते हैं कि शिक्षा से लोगों में जागरूकता और वैज्ञानिक चेतना आती है जो भाजपा की दक़ियानूसी, रूढ़िवादी, संकीर्ण सोच और तंग नजरिये को उखाड़ फेंकने का काम करेगी। इसीलिए भाजपाई शिक्षा और ज्ञान-विज्ञान के खिलाफ रहते हैं तथा उनके संगी-साथी अपनी अति-संकीर्ण मानसिकता व एकरंगी नकारात्मक विचारधारा के तहत ही बच्चों को ढालना चाहते हैं। बच्चों से शिक्षा-तालीम का अधिकार छीनना, भाजपाइयों का सामाजिक अपराध है। सरकारी शिक्षा के छिनने से सबसे ज्यादा नुकसान पीडीए समाज के लोगों को ही होगा क्योंकि शिक्षा के साथ-साथ पोषण के लिए मिलने वाला मिड-डे मील भी बच्चों को नहीं मिलेगा, जिसका बुरा असर बच्चों के मानसिक-शारीरिक विकास पर होगा।
अगला चुनाव होगा ऐतिहासिक
सपा प्रमुख ने कहा कि हमारा मानना है कि अगला चुनाव ऐतिहासिक होगा जब शिक्षा का विषय, भाजपा को हराने-हटाने के लिए एक निर्णायक मुद्दा बनेगा क्योंकि गरीब से गरीब परिवार और ख़ासतौर से हर माँ अपने बच्चे को पढ़ाना चाहती है। इस बार महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी। भाजपा खातों में कुछ पैसे डालने का दिखावा करेगी लेकिन गांव-गली-मोहल्ले तक ये बात फैल चुकी है कि अगर सरकारी स्कूल बंद हो गए तो प्राइवेट स्कूलों की लूट शुरू हो जाएगी और खाते में जितना आएगा नहीं उससे ज्यादा बच्चों की पढ़ाई में ही चला जाएगा। अब लोग समझ गये हैं कि भाजपा जितना देती नहीं है उससे कहीं ज्यादा सामानों के दाम बढ़ाकर और बिजली-पानी के बिल, गैस-डीजल-पेट्रोल-सिलेंडर, मोबाइल रिचार्ज, रेल-बस किराये, टोल-पार्किंग को महंगा करके व अन्य टैक्सों को बढ़ाकर वसूल लेती है।
अगर सरकारी शिक्षा खत्म हो गई तो लोग बच्चों को पढ़ा ही नहीं पाएंगे
अगर सरकारी शिक्षा खत्म हो गई तो महंगाई और बेकारी-बेरोजगारी के मारे लोग बच्चों को पढ़ा ही नहीं पाएंगे और जो किसी भी तरह पढ़ाना भी चाहेंगे तो उनकी सारी कमाई, प्राइवेट स्कूलों की भारी भरकम फीस, यूनिफॉर्म-ड्रेस; किताब-कॉपी-स्टेशनरी; बस्ता-बोटल-टिफिन; रिक्शा-बस, प्रोजेक्ट-एसाइनमेंट, स्कूल फंक्शन-पिकनिक के खर्चों में ही निकल जाएगी। इसके अतिरिक्त जो स्कूल चल भी रहे हैं, वहां भी भाजपा शिक्षा का काम चलने ही नहीं देना चाहती है और शिक्षकों को पढ़ाई की जगह अन्य कामों में लगा देती है। इससे सच्चे शिक्षकों का मनोबल गिरता है क्योंकि उन्हें लगता है कि वो पढ़ाने का अपना कर्तव्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण शिक्षक-शिक्षार्थी और अभिभावक का संबंध भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
शिक्षा को बचाएं, बच्चों का भविष्य बनाएं
अखिलेख ने कहा कि भाजपा सरकार की शिक्षा-विरोधी नीतियों की वजह से समाज में शिक्षा-शिक्षक के मान-सम्मान को चोट पहुंची है। इसीलिए शिक्षक समाज में भाजपा के खिलाफ गहरी नाराजगी और असंतोष है। अगले चुनाव में भाजपा की हार के मुख्य कारणों में एक कारण शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विद्यालयों के कर्मचारियों व शिक्षा से वंचित होते बच्चों के माता-पिता और उनके परिवार के अन्य लोगों का भाजपा के विरुध्द आक्रोश भी होगा। लगता है पीडीए पाठशाला’ के सांकेतिक आंदोलन को एक वास्तविक आंदोलन के रूप में बदलना होगा, तभी शोषित-वंचित समाज की पीढ़ियां आगे पढ़ और बढ़ पाएंगी। आइए हम सब मिलकर शिक्षा को बचाएं, अपने बच्चों का भविष्य बनाएं। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



