Supreme Court News: लोकतांत्रिक देश को पुलिस राज्य की तरह काम नहीं करना चाहिए : उच्चतम न्यायालय

Supreme Court: उच्चतम न्यायालय ने जांच पूरी होने के बावजूद निचली अदालतों द्वारा कम गंभीर मामलों में जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने पर निराशा जताई है। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइंया की पीठ ने मंगलवार को कहा कि एक लोकतांत्रिक देश को पुलिस राज्य की तरह काम नहीं करना चाहिए, जहां कानून प्रवर्तन एजेंसियां बिना किसी वास्तविक कारण के लोगों को हिरासत में लेने के लिए मनमानी शक्तियों का इस्तेमाल करती हैं।
कहा, न्यायपालिका पर अनावश्यक रूप से बोझ डाला जा रहा
पीठ ने कहा कि दो दशक पहले छोटे मामलों में जमानत याचिकाएं उच्च न्यायालयों तक शायद ही कभी पहुंचती थीं, शीर्ष अदालत तक तो बात ही छोड़िए। न्यायमूर्ति ओका ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि उच्चतम न्यायालय उन मामलों में जमानत याचिकाओं पर फैसला सुना रहा है, जिनका निपटारा निचली अदालत के स्तर पर होना चाहिए। न्यायपालिका पर अनावश्यक रूप से बोझ डाला जा रहा है। यह पहली बार नहीं है, जब शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर टिप्पणी की है। इसने बार-बार निचली अदालतों और उच्च न्यायालयों से जमानत देने में अधिक उदार रुख अपनाने का आग्रह किया है, खासकर छोटे उल्लंघनों से जुड़े मामलों में।
जानें, क्या है मामला
सुनवाई के दौरान पीठ ने एक आरोपी को जमानत दे दी, जो धोखाधड़ी के एक मामले में दो साल से अधिक समय से हिरासत में था। जांच पूरी हो जाने और आरोपपत्र दायर हो जाने के बावजूद आरोपी की जमानत याचिका निचली अदालत और गुजरात उच्च न्यायालय दोनों ने खारिज कर दी थी। उच्चतम न्यायालय ने 2022 में जांच एजेंसियों पर उन संज्ञेय अपराधों में गिरफ्तारी करने पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिनमें हिरासत की आवश्यकता न होने पर अधिकतम सात साल तक की सजा हो सकती है। इसने निचली अदालतों से यह सुनिश्चित करके व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने का भी आग्रह किया था कि जमानत निष्पक्ष और समय पर दी जाए।
उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीशों संबंधी लोकपाल के आदेश पर स्वत: संज्ञान सुनवाई करेगी शीर्ष अदालत
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों पर विचार करने के लोकपाल के आदेश पर 15 अप्रैल को स्वत: संज्ञान सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति अभय एस ओका की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार को इस मामले में न्यायमित्र के रूप में उच्चतम न्यायालय की सहायता करने को कहा।
बूथवार मत प्रतिशत आंकड़ा अपलोड करने के बारे में बात करने को तैयार: निर्वाचन आयोग ने न्यायालय से कहा
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग की उस दलील पर गौर किया जिसमें आयोग ने कहा कि वह अपनी वेबसाइट पर बूथवार मत प्रतिशत आंकड़ा अपलोड करने की मांग पर विचार-विमर्श के लिए तैयार है। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से 10 दिन में निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रतिवेदन देने को कहा। (भाषा)



