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NCW: दुष्कर्म को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर उच्चतम न्यायालय की रोक, राष्ट्रीय महिला आयोग ने किया स्वागत

Supreme Court News: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की विवादास्पद टिप्पणियों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत किया है।

जानें, क्या कहा था हाई कोर्ट ने
उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की थी कि किसी महिला के निजी अंगों को पकड़ने और उसके पायजामे का नाड़ा खींचने से बलात्कार के प्रयास का आरोप नहीं बनता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया
शीर्ष अदालत ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे चौंकाने वाला बताया और कहा कि ये टिप्पणियां न्यायाधीश की ओर से पूर्णतया असंवेदनशीलता को दर्शाती हैं।

एनसीडब्ल्यू ने किया स्वागत
एनसीडब्ल्यू ने कहा कि उसने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए विस्तृत आधार पहले ही विधि एवं न्याय मंत्रालय को सौंप दिए हैं तथा वह उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत करती है।

न्यायालय ने दुष्कर्म पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की टिप्पणियों पर रोक लगाई
न्यायालय ने बुधवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश में की गईं उन टिप्पणियों पर रोक लगा दी कि महज स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना बलात्कार के अपराध के दायरे में नहीं आता। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि उसे यह कहते हुए तकलीफ हो रही है कि उच्च न्यायालय के आदेश में की गईं कुछ टिप्पणियां पूरी तरह से असंवेदनशील और अमानवीय दृष्टिकोण वाली हैं।

असंवेदनशील और अमानवीय, उच्चतम न्यायालय ने दुष्कर्म पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की टिप्पणियों पर कहा
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के बलात्कार संबंधी हालिया दृष्टिकोण पर कड़ी आपत्ति जताई तथा उसकी टिप्पणियों को पूर्णतः असंवेदनशील तथा अमानवीय दृष्टिकोण’’ वाला बताते हुए इन पर रोक लगा दी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ये कहा था
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 17 मार्च के अपने एक आदेश में कहा था की महज स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना बलात्कार के अपराध के दायरे में नहीं आता। (भाषा)

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