Bihar Politics: नीतीश कुमार के बेटे निशांत की सद्भाव यात्रा इसलिए है खास

Sadbhav Yatra: बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) नेता निशांत कुमार रविवार को अपना पहला जनसंपर्क कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं। नीतीश कुमार के अचानक मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उनके निशांत कुमार का देर से ही सही, लेकिन पार्टी में आना आशा की किरण लेकर आया है। पिछले महीने ही पार्टी में शामिल हुए 45 वर्षीय कुमार पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर से अपनी सद्भाव यात्रा शुरू करने वाले हैं। नीतीश के बेटे निशांत की सद्भाव यात्रा कई मायनों में खास है। सूत्रों के मुताबिक, यह यात्रा नीतीश कुमार की विरासत और निशांत कुमार का इम्तिहान है। साथ ही, यह यात्रा जदयू का भविष्य तय करेगी। इसलिए इस यात्रा पर सबकी नजर है।

जदयू की रणनीति
बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग दो दशक लंबे कार्यकाल के दौरान उनके पिता ने कई बार इस स्थान को अपनी कई यात्राओं के आरंभिक बिंदु के रूप में चुना था। नीतीश कुमार (75) के अचानक राज्यसभा जाने के फैसले से लगे झटके से पार्टी अभी उबरने का प्रयास कर रही है। कुमार के बिहार की सत्ता छोड़ने से पार्टी के राजनीतिक प्रभाव में कमी आने की आशंका पैदा हो गई थी, हालांकि अब निशांत कुमार के रूप में उनके उत्तराधिकारी के आगमन ने पार्टी को राहत दी है जिनकी इस यात्रा को लेकर पार्टी ने एक आकर्षक नारा भी गढ़ा है।

अब जय निशांत, तय निशांत का नारा
जय निशांत, तय निशांत का नारा अब जदयू के पोस्टरों के साथ-साथ सोशल मीडिया हैंडल पर भी छाया हुआ देखा जा सकता है। सद्भाव यात्रा की शुरुआत की पूर्व संध्या पर जदयू के प्रवक्ता और विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) नीरज कुमार ने पश्चिम चंपारण के मुख्यालय बेतिया में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि निशांत का संबंध उस भूमि से है, जहां सम्राट अशोक का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि अपने पिता की तरह वह भी ऋषि वाल्मीकि की भूमि से यात्रा शुरू कर रहे हैं। अब देखना यह है कि निशांत इस यात्रा के जरिए बिहार के लोगों से कितना जुड़ पाते हैं। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



