Sickle Cell Disease: द्रौपदी मुर्मू बोलीं, सामूहिक प्रयास से 2047 से पहले ही जड़ से मिट जाएगा सिकल सेल रोग

Sickle Cell Disease: आदिवासी समुदायों में सिकल सेल रोग के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और इसके उन्मूलन के लिए मिले-जुले प्रयासों की जरूरत पर जोर देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को भरोसा जताया कि आनुवंशिक रक्त विकार से जुड़ी यह बीमारी वर्ष 2047 के लक्ष्य से बहुत पहले ही देश में जड़ से मिटा दी जाएगी।
सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को सरकार ने गंभीरता से लिया
द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कहा कि सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया। पिछले कुछ वर्षों में एक समग्र दृष्टि से सरकार ने जो प्रयास किये हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। मिशन मोड में हुई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अभी तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिन्हित किए जा चुके हैं। इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक भी पहचाने जा चुके हैं।
महिलाओं की सिकल सेल स्क्रीनिंग का कीर्तिमान स्थापित किया
राष्ट्रपति ने कहा कि गत वर्ष 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक चले स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत मध्य प्रदेश ने चार लाख से अधिक महिलाओं की सिकल सेल स्क्रीनिंग का कीर्तिमान स्थापित करके इस समस्या के समाधान हेतु अमूल्य योगदान दिया है। मुझे विश्वास है कि सभी प्रदेशों की समेकित शक्ति और सक्रियता से हम वर्ष 2047 से बहुत पहले ही देश से सिकल सेल संबंधी रोगों के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य में अवश्य सफल होंगे।
जानें, क्या है सिकल सेल रोग
सिकल सेल रोग अनुवांशिक रक्त विकार है, जो माता-पिता से बच्चों में फैलता है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य और लचीली होने के बजाय कठोर और हंसिए या अर्धचंद्र के आकार की हो जाती हैं, जिससे रक्त संचार बाधित होता है और अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती है।
सिकल सेल रोग के लक्षण
रक्त वाहिकाओं के रुकने से हड्डियों, छाती और जोड़ों में अचानक तेज दर्द होता है।
असामान्य कोशिकाएं जल्दी टूट जाती हैं, जिससे कमजोरी, थकान और सांस फूलने की समस्या होती है।
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे छोटे बच्चों में बार-बार बुखार या संक्रमण हो सकता है।
हाथ-पैरों में सूजन आना और बच्चों का शारीरिक विकास धीमा होना। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



