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Sonam Wangchuk: जानें, कौन हैं सोनम वांगचुक, क्यों लिया गया हिरासत में, किसने-क्या-कहा

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (Ladakh) को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी तक मार्च करने वाले सौनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) सहित लद्दाख के करीब 120 लोगों को दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी की सीमा पर हिरासत में ले लिया।

सोनम वांगचुक और लद्दाख के अन्य लोगों को हिरासत में लिया जाना अस्वीकार्य : राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अन्य लद्दाख वासियों को हिरासत में लिया जाना ‘‘अस्वीकार्य’’ है। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लद्दाख की आवाज सुननी होगी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक मार्च कर रहे सोनम वांगचुक जी और लद्दाख के सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया जाना अस्वीकार्य है।’’ पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी पूछा कि लद्दाख के भविष्य के लिए आवाज उठाने वाले बुजुर्ग नागरिकों को दिल्ली की सीमा पर आखिर हिरासत में क्यों लिया गया। राहुल ने कहा कि मोदी जी, किसानों के मामले की तरह यह चक्रव्यूह भी टूटेगा और आपका अहंकार भी टूटेगा। आपको लद्दाख की आवाज सुननी होगी।

हिरासत में लिए जाने से पहले वाांगचुक ने इंस्टाग्राम पर साझा की तस्वीरें
हिरासत में लिए जाने से कुछ समय पहले ‘इंस्टाग्राम’ पर एक पोस्ट में वांगचुक ने दिल्ली सीमा से तस्वीरें साझा की थीं, जहां व्यापक पुलिस बल की मौजूदगी के बीच उनकी बसों को रोका गया था। वीडियो में पर्यावरण कार्यकर्ता पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत करते देखे जा सकते हैं। पोस्ट में वांगचुक ने कहा कि दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस के कई वाहन उनकी बसों के साथ थे। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू में लगा कि राष्ट्रीय राजधानी के पास पहुंचने पर ये बसें उनकी सुरक्षा के लिए उनके पीछे-पीछे चल रही हैं, लेकिन बाद में यह स्पष्ट था कि उन्हें हिरासत में लिया जाने वाला है।

वांगचुक ने कही ये बात
वांगचुक ने कहा कि जैसे-जैसे हम दिल्ली के पास पहुंच रहे हैं, ऐसा लगने लगा कि हमें सुरक्षा नहीं दी जा रही बल्कि हमें हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सीमा पर लगभग 1,000 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है और उन्हें बताया गया है कि दिल्ली में लद्दाख भवन और केंद्र शासित प्रदेश के छात्रों के रहने वाले क्षेत्रों में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे नहीं चाहते कि यह पदयात्रा हो।

पदयात्रा के मायने
पदयात्रा का आयोजन ‘लेह एपेक्स बॉडी’ द्वारा किया गया था, जो ‘करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ के साथ मिलकर पिछले चार साल से लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची में इसे शामिल करने, लद्दाख के लिए लोक सेवा आयोग के साथ शीघ्र भर्ती प्रक्रिया और लेह एवं करगिल जिलों के लिए अलग लोकसभा सीट की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही है।

दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिबंध
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कई संगठनों द्वारा विरोध-प्रदर्शन के आह्वान सहित कानून-व्यवस्था के मुद्दों का हवाला देते हुए अगले छह दिन के लिए मध्य भाग और सीमावर्ती क्षेत्रों में पांच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने, बैनर, तख्तियां और हथियार लेकर चलने एवं विरोध प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगा दिया।

जानें, कौन हैं सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता हैं। उनका जन्म एक सितंबर, 1966 को अलची, लद्दाख में हुआ था। वह स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख के संस्थापक-निदेशक हैं। 1993 से 2005 तक वांगचुक ने लैंडेग्स मेलॉग, जो लद्दाख की एकमात्र प्रिंटिंग पत्रिका है की स्थापना की और संपादक के रूप में कार्य किया। शिक्षा में मैकेनिकल इंजीनियर वांगचुक 30 से अधिक वर्षों से शिक्षा सुधार के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

ऐसे आए चर्चा में
बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की फिल्म “थ्री इडियट” सोनम वांगचुक के जीवन से प्रेरित थी। इस फिल्म के बाद वह चर्चा में आए। एनआईटी श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले सोनम वांगचुक शिक्षा में सुधार और लद्दाख तथा देश के विकास के लिए काम कर रहे हैं। वांगचुक ने कई आविष्कार किए हैं, जिनमें सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट, आर्टिफिशियल ग्लेशियर और एसईसीएमओएल परिसर का डिजाइन शामिल हैं।

कर रहे हैं ये मांग
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया गया, जिसमें लद्दाख को बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। इससे वहां का विशेष दर्जा खत्म हो गया। केंद्र शासित प्रदेश के निर्माण ने उन्हें विधायिका के बिना ही छोड़ दिया, जिससे वे स्वायत्तता से वंचित हो गए। शासन में सरकारी नौकरियों और भूमि अधिकारों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग और छठी अनुसूची के अलावा पूर्ण राज्य की मांग, लद्दाख में एक और संसदीय सीट को बढ़ाना आंदोलनकारियों के मांग में शामिल है। इसको लेकर लद्दाख के लोग 2019 से ही प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसका नेतृत्व सोनम वांगचुक कर रहे हैं। वह इससे पहले भी मार्च में 21 दिन भूख हड़ताल कर चुके है। अब देखना यह है कि उनकी मांगें पूरी हो पाएंगी या नहीं। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

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