UP Politics: यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने योगी सरकार से पूछे 24 सवाल

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। साथ ही, भाजपा सरकार से 24 सवाल भी पूछे हैं।
बांटने की राजनीति करने वाले लोग खुद बंट गए
अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा है कि अब जब भाजपा के संगी-साथी कह रहे हैं कि वो बूथ पर जाकर व्यवस्था संभालेंगे तो इसका मतलब साफ है कि वो लोकसभा चुनाव में हुई ऐतिहासिक पराजय को देखते हुए ये मानकर चल रहे हैं कि भाजपा का कार्यकर्ता हताश होकर बूथ छोड़कर भाग चुका है या फिर अब भाजपा के मुखौटाधारी केवल सत्ता लोलुप संगी-साथियों को भाजपा के कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं रहा है। दरअसल, चुनावी हार के बाद भाजपाई गुटों ने आपस में विश्वास खो दिया है। इसका एक और पहलू यह भी है कि भाजपा का ‘संगी-साथी’ पक्ष ये दिखाना चाहता है कि हार का कारण वो नहीं था, वो तो अभी भी शक्तिशाली है, कमज़ोर तो भाजपा हुई है। इन दोनों ही परिस्थितियों में यह तो साबित होता है कि भाजपाइयों ने हार स्वीकार कर ली है और अब भविष्य के लिए बेहद चिंतित हैं, लेकिन आपस में दोषारोपण करके, न तो ये एक-दूसरे का भरोसा जीत पाएंगे और न ही कोई आगामी चुनाव। बांटने की राजनीति करने वाले लोग खुद बंट गए हैं।
पन्ना प्रमुख इतिहास बन गए
भाजपा अपनी चाणक्य नीति के तहत जिन ‘पन्ना प्रमुखों’ की बात करती थी, अब क्या वो इतिहास बन गए? आज अगर वो उपलब्ध नहीं हैं, तो उसके पीछे कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं। अब भाजपा के जो गिने-चुने कार्यकर्ता बाकी हैं, वो ये सोचकर हताश हैं कि वर्तमान परिस्थिति में, जबकि समाज का 90% PDA समाज जाग उठा है और PDA की बात करने वालों के साथ खड़ा है तो फिर वो किसके पास जाकर वोट मांगें और 90% PDA समाज के सामने आकर क्यों उनके विरोधी होने का ठप्पा खुद पर लगाएं, आखिरकार उन्हें भी तो उसी 90% समाज के बीच ही रहना है।
भाजपा के लिए भ्रष्टाचार ही साध्य है
ऐसे भूतपूर्व भाजपाई पन्ना प्रमुख ये सच्चाई भी जान चुके हैं कि भाजपा में किसी की कोई सुनवाई नहीं है, तो ऐसे दल में रहकर कभी भी कोई मान-सम्मान-स्थान उन्हें मिलनेवाला नहीं है। इसीलिए वो ऐसे उन अन्य दलों में ठिकाना ढूंढ रहे हैं, जो सच में जनता के साथ हैं और जनता उन जन-हितैषी दलों के साथ। वो ऐसे दलों की सच्चाई भी जान चुके हैं जो भाजपा की राजनीति के मोहरे बनकर काम कर रहे हैं। वो देख रहे हैं कि जनता अब PDA की एकता और एकजुटता के साथ है, क्योंकि PDA की सकारात्मक राजनीति लोगों को जोड़ती है और जनता के भले के लिए राजनीति को एक सशक्त माध्यम मानती है। इसीलिए समाज का अंतिम पंक्ति में खड़ा सर्वाधिक प्रताड़ित और शोषित-वंचित समाज भी PDA में ही अपना भविष्य देख रहा है। आज़ादी के बाद सामाजिक-मानसिक और आर्थिक परिप्रेक्ष्यों में PDA सर्वाधिक शक्तिशाली और सफल क्रांतिकारी आंदोलन बनकर उभरा है। PDA के लिए राजनीति साधन भर है, साध्य है समाज का कल्याण। इसके ठीक विपरीत भाजपा के लिए चुनावी जीत और सत्ता की किसी भी तरह प्राप्ति करके जनता के हितों को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार करना ही साध्य है।
भाजपा में जमीनी और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं का सूखा पड़ गया
इन्हीं सब कारणों से भाजपा में जमीनी और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं का सूखा पड़ गया है। अब जब ये भाजपाई संगी-साथी गांव-गलियों में जाएंगे तो जनता के सवालों की लंबी सूची उनका इंतजार कर रही होगी। PDA प्रश्नों के रूप में एक लंबी सूची उनकी प्रतीक्षा कर रही होगी, जो पूछेगी :
- छुट्टा जानवरों से निजात दिलवाने का झूठा वादा क्यों किया?
- काले कानून लाकर किसानों की भूमि क्यों हड़पनी चाही?
- किसानों पर गाड़ी क्यों चढ़वाई?
- किसानों को लाभकारी एमएसपी क्यों नहीं दिया?
- संविधान की समीक्षा और उसे बदलने की बात क्यों करी?
- 69000 में आरक्षण का हक क्यों मारा?
- आरक्षण का हक मारते हुए, पिछले दरवाज़े से लेटरल भर्ती का षड्यंत्र क्यों रचा?
- नौकरियों की जगह संविदा की व्यवस्था लाकर आरक्षण का अधिकार क्यों छीना?
- अग्निवीर सैन्य भर्ती लाकर युवाओं का भविष्य बर्बाद क्यों किया?
- पुलिस भर्ती में हेराफेरी क्यों करी?
- नीट व अन्य पेपर लीक क्यों करवाए?
- पैसे वालों को लाभ पहुंचाने के लिए महंगाई को बेतहाशा बढ़ने क्यों दिया?
- 15 हजार खाते में देने का महाझूठ क्यों बोला?
- नोटबंदी व जीएसटी से काम-कारोबार तबाह क्यों किया?
- नजूल व वक्फ भूमि को हड़पने की कोशिश क्यों करी?
- लाखों लोगों के घर-मकान-दुकान पर बुलडोजर क्यों चलवाया?
- जमीनों का सही मुआवजा क्यों नहीं दिया?
- महिला का शोषण करने वालों को राजनीतिक प्रश्रय क्यों दिया?
- मजदूरों की मज़दूरी में बढ़ोतरी क्यों नही करी?
- गरीबों के नाम पर चल रही योजनाओं में भ्रष्टाचार क्यों होने दिया?
- प्रेस के साथ अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोटने के लिए कानून क्यों लाए?
- बैंकों में पेनल्टी लगाकर जनता की बचत का पैसा क्यों हड़पा?
- शिक्षा और सेहत को निजी हाथों में देकर महंगा क्यों किया?
- समाज के प्रेम, सौहार्द, भाईचारे को खत्म करने की साजिश क्यों करी?
ऐसे अनगिनत सवाल हर पगडंडी-पंचायत, नुक्कड़-मोड़,
बाजार-हाट, चौक-चौबारे पर भाजपा के संगी-साथियों का इंतजार कर रहे हैं।
अब जनता भाजपा के संगी-साथियों से ये कहने को बेसब्र है कि जो जनता के साथ नहीं, उससे करनी बात नहीं। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



