Strike: वकीलों की हड़ताल पर सख्ती, अब साथी की मौत पर शोक व्यक्त करने के लिए काम से विरत नहीं रह सकेंगे

वकीलों (Lawyers) की हड़ताल पर हाई कोर्ट सख्त है। भारत में उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शनिवार को प्रदेश में वकीलों की हड़ताल को आपराधिक अवमानना करार दिया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि कोई भी वकील या बार एसोसिएशन हड़ताल करता है अथवा प्रस्ताव करता है या न्यायिक कार्य से विरत रहता है, तो जिला जज की रिपोर्ट पर उसके खिलाफ स्वतः आपराधिक अवमानना कार्यवाही की जाएगी। हाईकोर्ट ने सभी जिला जजों को वकीलों को हड़ताल अथवा न्यायिक कार्य बहिष्कार की रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है ,ताकि अवमानना कार्यवाही ही सके।
कहा-अधिवक्ता साथी के निधन पर दिन में 3.30 बजे शोक सभा की जाए, ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो
बार कौंसिल आफ इंडिया और उत्तर प्रदेश बार कौंसिल ने प्रस्ताव किया है कि अधिवक्ता साथी के निधन पर दिन में 3.30 बजे शोक सभा की जाए, ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो। हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रस्ताव के उल्लधंन पर आपराधिक अवमानना कार्यवाही होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति डा. गौतम चौधरी की खंडपीठ ने जिला जज प्रयागराज की रिपोर्ट पर शुरू आपराधिक अवमानना केस की सुनवाई करते हुए दिया है।
शिकायत निवारण समिति गठित की गई
बार कौंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्र और उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा ने कहा कि वकीलों की शिकायतों की सुनवाई नहीं होती। ऐसे में उनके पास हड़ताल कर ही विकल्प है। प्रशासन की पहल पर अधिकांश समस्या खत्म हो सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी या नामित अपर जिलाधिकारी को समिति में शामिल करने का निर्देश दिया। महानिबंधक ने बताया कि तीन मई, 2013 को हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश व जिला अदालतों में जिला जज सीनियर अपर जिला जज की अध्यक्षता में शिकायत निवारण समिति गठित की गई है।
महानिबंधक से मांगी अनुपालन रिपोर्ट
महानिबंधक को हाई कोर्ट ने आदेश जिला जजों को भिजवाने के लिए कहा जो नोटिस बोर्ड पर लगाया आएगा, ताकि शोक सभा दोपहर 3.30 बजे से करने संबंधी प्रस्ताव का कड़ाई से पालन हो। महानिबंधक से सभी जिलों में आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
कहा, वकालत नोबल प्रोफेशन
हाईकोर्ट ने कहा कि वकालत नोबल प्रोफेशन है। यह कोर्ट के जरिए नागरिकों के अधिकार संरक्षित करता है। देश को आजादी में वकीलों का बड़ा योगदान है। वकील, आम आदमी के हित के ऊपर अपना हित न रखें। जब तक न्याय प्रशासन ठीक से काम नहीं करेगा, कानून का शासन सुनिश्चित नहीं किया जा सकेगा। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सहित देश-विदेश के न्यायालयों में आए दिन होने वाली हड़ताल की वजह से कार्य प्रभावित होता है। इसके चलते वादियों को परेशानी होती है। उन्हें न्याय के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



