Kishore Kumar: घोर निराशा में भी आशा की किरण जगा देता है ये गीत

Kishore Kumar: रुपहले पर्दे पर चमकने वाले सितारों की बात करें, तो इनमें किशोर कुमार (Kishore Kumar) की पहचान सबसे चमकदार सितारों में से एक के तौर पर होती है। शानदार अभिनेता, सुरीले गायक, उम्दा निर्माता-निर्देशक, कुशल पटकथा लेखक और बेहतरीन संगीतकार के तौर पर किशोर को एक संपूर्ण कलाकार कहा जा सकता है।
चाहे दर्द भरे गीत हों या रूमानियत से भरे प्रेमगीत, हुल्लड़ वाले जोशीले नगमे हों या संजीदा गाने, उनकी आवाज ने हर तरह के गीतों को यादगार बना दिया। उन्होंने हिंदी के अलावा और भी बहुत सी भाषाओं में गीत गाए। उनके अभिनय और निर्देशन को भी काफी सराहना मिली। हास्य अभिनय में किशोर कुमार अनूठे और बेजोड़ थे। इस महान कलाकार ने 13 अक्टूबर 1987 को इस दुनिया को अलविदा कहा था।
किशोर कुमार का यह गीत घोर निराशा (Despair) में भी आशा (Hope) की किरण जगा देता हैः
आ चल के तुझे, मैं ले के चलूं
इक ऐसे गगन के तले
जहां गम भी न हो, आंसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले
इक ऐसे गगन के तले
सूरज की पहली किरण से
सूरज की पहली किरण से
आशा का सवेरा जागे
चंदा की किरण से धुल कर,
घनघोर अंधेरा भागे
कभी धूप खिले कभी छांव मिले
लंबी सी डगर न खले
जहां गम भी न हो, आंसू भी न हो।
किशोर कुमार का यह गीत आज भी लोगों में आशा की किरण जगाता है।
(सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



