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Vijayadashami: जानें, कब और क्यों मनाई जाती है विजयादशमी, इस दिन क्या देखना माना जाता है शुभ

देशभर में शनिवार को विजयादशमी (Vijayadashami) मनाई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोगों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। दशहरा के त्योहार को विजयादशमी के रूप में भी जाना जाता है और यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

जानें, क्यों मनाई जाती है विजयादशमी
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, 14 वर्ष के वनवास के दौरान लंकापति रावण ने जब सीता का अपहरण किया, तो भगवान राम ने हनुमान को सीता की खोज करने के लिए भेजा। हनुमान ने रावण को समझाया कि सीता को सम्‍मान सहित राम के पास भेज दे। मगर रावण ने हनुमान की बात नहीं मानी। राम ने जिस दिन रावण का वध किया, उस दिन शारदीय नवरात्र की दशमी तिथि थी। राम ने नौ दिन तक मां दुर्गा की उपासनी की और 10वें दिन रावण पर विजय प्राप्‍त की, इसलिए इस त्‍योहार को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। रावण के बुरे कर्मों पर श्रीराम की अच्‍छाइयों की जीत हुई, इसलिए इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के त्योहार के रूप में भी मनाते हैं। इस दिन रावण के साथ उसके पुत्र मेघनाद और उसके भाई कुंभकरण के पुतलों का भी दहन किया जाता है।

मां दुर्गा ने महिसाषुर का किया था वध
यह भी मान्यता है कि विजयादशमी के दिन मां दुर्गा ने चंडी रूप धर कर महिषासुर नामक असुर का वध किया था। महिषासुर और उसकी सेना द्वारा देवताओं को परेशान किए जाने की वजह से मां दुर्गा ने लगातार नौ दिनों तक महिषासुर और उसकी सेना से युद्ध किया था और 10वें दिन उन्‍हें महिसाषुर का अंत करने में सफलता प्राप्‍त हुई। इसलिए भी शारदीय नवरात्र के बाद विजयादशमी मनाने की परंपरा है। इसी दिन मां दुर्गा की मूर्ति का भी विसर्जन किया जाता है।

इस दिन ये देखना है शुभ
मान्यता है कि विजयादशमी के दिन नीलकंठ पक्षी को देखने से भाग्योदय होता है और दरिद्रता दूर होती है। इसलिए इस दिन लोग अपने घरों की छत पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन करने के लिए आकाश को निहारते हैं, ताकि साल भर जीवन में शुभ कार्य का सिलसिला चलता रहे। कहा जाता है कि जब भगवान राम रावण का अंत करने जा रहे थे, उससे पहले राम ने नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे, इसके बाद ही रावण पर विजय प्राप्त की थी। इसलिए नीलकंठ पक्षी को शुभ और विजय का संकेत माना गया है।

इसके दर्शन से दूर हो जाती हैं समस्याएं
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन होना बहुत शुभ माना गया है और लेकिन इसके दर्शन होना बहुत दुर्लभ माने गए हैं। दशहरे के दिन इस पक्षी के दर्शन करने से मात्र से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है और सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

शुभ और विजय का संकेत है ये
कहा जाता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम पर ब्राह्मण हत्या का पाप लगा था। भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण के साथ मिलकर भगवान शिव की पूजा अर्चना की और खुद ब्राह्मण हत्या के पाप से खुद को मुक्त करवाया था। तब भगवान शिव नीलकंठ के रूप में धरती पर आए थे और लोगों को दर्शन दिए थे। नीलकंठ अर्थात जिसका कंठ अर्थात गला नीला हो।

भगवान शिव का प्रतीक है यह
धर्म शास्त्रों में नीलकंठ को भगवान शिव का प्रतीक माना गया है। यह पक्षी भगवान शिव के स्वरूप और प्रतिनिधि के तौर पर पृथ्वी पर विचरण करता है। नीलकंठ पक्षी से ना केवल भाग्योदय होता है बल्कि किसानों को भी इस पक्षी से बहुत फायदा मिलता है। दरअसल नीलकंठ पक्षी किसानों की फसलों का रख रखाव करता है, वह खेतों में कीड़ों को खाकर किसानों की फसलों को सुरक्षित करता है।

प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से सभी को जीवन के हर क्षेत्र में विजय हासिल हो, यही कामनाः मोदी
प्रधानमंत्री ने मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा कि देशवासियों को विजयादशमी की असीम शुभकामनाएं। मां दुर्गा और प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से आप सभी को जीवन के हर क्षेत्र में विजय हासिल हो, यही कामना है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने दी शुभकामनाएं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देशवासियों को अपनी शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह त्योहार उच्च मानवीय आदर्शों में अपनी आस्था को और मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है।

‘राम राज्य’ का मतलब है सबके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल: अरविंद केजरीवाल
आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने ‘‘राम राज्य’’ स्थापित करने का आह्वान करते हुए शुक्रवार को कहा कि देश में कोई भी बच्चा अशिक्षित नहीं रहना चाहिए और किसी को भी स्वास्थ्य सेवा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार में रामलीला में शरीक होते हुए उन्होंने कहा कि ‘आप’ दिल्ली के लोगों की सेवा करने के लिए ‘‘राम राज्य के सिद्धांतों’’ पर चल रही है। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

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