Strike: हड़ताल समस्या का समाधान नहीं है तो करते क्यों हैं, कौन है जिम्मेदार?

भारत (Bharat) के पश्चिम बंगाल में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कालेज की प्रशिक्षु महिला डाक्टर से दुष्कर्म और फिर हत्या पर देश भर के डाक्टरों व अन्य मेडिकल स्टाफ का आक्रोशित होना स्वाभाविक है, लेकिन इस घटना को लेकर अपना क्षोभ व्यक्त करने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने जिस तरह 24 घंटे की हड़ताल की और उसमें निजी अस्पताल भी शामिल हुए, उससे लाखों मरीजों की परेशान होना पड़ा। इस दौरान जिस प्रकार आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी सेवाएं स्थगित रहीं, उससे मरीजों की मुसीबत और बढ़ गई।
हड़ताल के दौरान आपरेशन तक स्थगित कर दिए गए और मरीजों को दवाएं तक नसीब नहीं हुईं। हड़ताल से बेहाल मरीज इधर-अधर भटकते रहे। इस हड़ताल का औचित्य इसलिए समझ नहीं आया, क्योंकि कोलकाता की घटना पर देश के कई शहरों के अनेक अस्पतालों के डाक्टर पहले ही हड़ताल कर चुके थे। इससे इन्कार नहीं कि कोलकाता में बहुत ही जघन्य अपराध हुआ और ममता सरकार ने इस भयावह घटना पर हद दर्जे की संवेदनहीनता का परिचय दिया, लेकिन आखिर इसकी सजा मरीजों को क्यों दी जा रही है? उनका तो कोई दोष ही नहीं।
देश और दुनिया में महिलाओं के प्रति समाज के नजरिये को बदलने की आवश्यकता है और इसमें अन्य वर्गों के साथ डाक्टरों को भी अपनी सक्रियता दिखानी चाहिए। उनकी सक्रियता कहीं अधिक प्रभावी सिद्ध हो सकती है। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



