Ram Navami: क्यों मनाई जाती है राम नवमी, इस बार कब मनेगी, जानें शुभ मुहूर्त; ऐसे करें पूजा

Ram Navami 2025: राम नवमी हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है। यह भगवान राम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।
इसलिए मनाई जाती है राम नवमी
राम नवमी का त्योहार भगवान राम के जीवन और उनके संदेशों को याद करने के लिए मनाया जाता है। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम माना जाता है, उन्होंने अपने जीवन में धर्म, न्याय और सत्य के मार्ग पर चलने का पाठ पढ़ाया था।
- पूजा-अर्चना: लोग भगवान राम की पूजा-अर्चना करते हैं और उन्हें फूल, फल और अन्य चीजें चढ़ाते हैं।
- रामायण का पाठ: लोग रामायण का पाठ करते हैं और भगवान राम के जीवन के बारे में जानते हैं।
- राम लीला: लोग राम लीला का आयोजन करते हैं, जिसमें भगवान राम के जीवन के महत्वपूर्ण दृश्यों का अभिनय किया जाता है।
- भजन और कीर्तन: लोग भगवान राम के भजन और कीर्तन करते हैं और उनकी महिमा का गुणगान करते हैं।
रामनवमी का त्योहार हमें भगवान राम के संदेशों को याद करने और उनके जीवन के मूल्यों को अपनाने का अवसर प्रदान करता है।
इस तिथि को मनाई जाती है राम नवमी
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन हुआ था। इसलिए हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार राम नवमी छह अप्रैल को मनाई जा रही है। इस दिन प्रभु श्रीराम की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। इसी दिन मां सिद्धदात्री की भी उपासना की जाती है।
मान्यता है कि चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर भगवान विष्णु ने भगवान श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। प्रभु राम राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर अवतरित हुए थे। इसलिए देशभर में अधिक उत्साह के साथ चैत्र माह में राम नवमी मनाई जाती है।
राम नवमी तिथि 2025
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि आरंभ: 05 अप्रैल 2025, शनिवार, सायं 07:26 मिनट पर
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि समाप्त: 06 अप्रैल 2025, रविवार, सायं 07:22 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार राम नवमी का पर्व 06 अप्रैल 2025 को मनाया जाएगा।
राम नवमी शुभ मुहूर्त 2025
राम नवमी की पूजा का शुभ समय: 06 अप्रैल 2025, प्रातः 11:08 मिनट से दोपहर 01:39 मिनट तक
राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त – प्रातः 11:07 से दोपहर 13:39 तक
राम नवमी पर क्या करें?
राम नवमी पर भगवान श्रीराम की पूजा करनी चाहिए।
विशेष चीजों का दान करना चाहिए।
प्रभु को पीले फूल अर्पित करें।
पूजा के दौरान राम चालीसा का पाठ करें।
पूजा के अंत में आरती अवश्य करें।
लोगों में प्रसाद का वितरण करें।
भगवान राम की आरती करें
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला भजन
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला,
कौसल्या हितकारी ।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी,
अद्भुत रूप बिचारी ॥
लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा,
निज आयुध भुजचारी ।
भूषन बनमाला, नयन बिसाला,
सोभासिंधु खरारी ॥
कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी,
केहि बिधि करूं अनंता ।
माया गुन ग्यानातीत अमाना,
वेद पुरान भनंता ॥
करुना सुख सागर, सब गुन आगर,
जेहि गावहिं श्रुति संता ।
सो मम हित लागी, जन अनुरागी,
भयउ प्रगट श्रीकंता ॥
ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया,
रोम रोम प्रति बेद कहै ।
मम उर सो बासी, यह उपहासी,
सुनत धीर मति थिर न रहै ॥
उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना,
चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।
कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई,
जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥
माता पुनि बोली, सो मति डोली,
तजहु तात यह रूपा ।
कीजै सिसुलीला, अति प्रियसीला,
यह सुख परम अनूपा ॥
सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना,
होइ बालक सुरभूपा ।
यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं,
ते न परहिं भवकूपा ॥
बिप्र धेनु सुर संत हित,
लीन्ह मनुज अवतार ।
निज इच्छा निर्मित तनु,
माया गुन गो पार ॥
जय श्री राम
मान्यता है कि राम नवमी के दिन सच्चे मन से मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



