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Swami Avimukteshwaranand: जानें, कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, क्यों हैं सुर्खियों में

Swami Avimukteshwarananda Saraswati: उत्तराखंड के चमोली में बद्रीनाथ धाम के पास ज्योतिष्पीठ के 55वें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों सुर्खियों में हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश में प्रयागराज माघ मेले के दौरान स्नान को लेकर पुलिस के साथ उनका विवाद हुआ था। इसके बाद कहा गया कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शंकराचार्य नहीं हैं। इस दौरान पुलिस के ऊपर उनके बटुक शिष्यों के अपमान के भी आरोप लगे। विवाद के बीच अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना स्नान किए ही माघ मेला छोड़ दिया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस पर आरोप लगाए।

जानें, क्या है मामला
इधर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य के खिलाफ इलाहाबाद जिला न्यायालय की विशेष पॉक्सो अदालत ने बच्चों के यौन शोषण के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। बताया गया कि यह मुकदमा आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दिया है।

कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 2002 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से दीक्षा ग्रहण की थी। संन्यास की दीक्षा ग्रहण करने से पहले उनका नाम उमाशंकर था। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का निधन होने के बाद उन्हें शंकराचार्य नियुक्त किया गया था। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के ब्राह्मणपुर जिले में पांच अगस्त, 1969 को उमाशंकर का जन्‍म हुआ था। उमाशंकर उपाध्याय की प्राथमिक शिक्षा प्रतापगढ़ में ही हुई। वाराणसी के मशहूर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की शिक्षा ग्रहण की है।

कहा, अगर पुलिस हमें अरेस्ट करने के लिए एक्शन भी लेती है, तो भी हम उनका विरोध नहीं करेंगे
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सोमवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अगर पुलिस हमें अरेस्ट करने के लिए एक्शन भी लेती है, तो भी हम उनका विरोध नहीं करेंगे। हम कोऑपरेट करेंगे। जनता सब देख रही है। झूठ आखिरकार सामने आ ही जाता है। कहानी झूठी साबित होगी, आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों। हम आपके कैमरों की पहुंच में थे। प्रयागराज में हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। उन्होंने उन्हें हर जगह इसलिए लगाया था, ताकि अगर कुछ भी हो, तो वे वॉर रूम से मॉनिटर कर सकें और उनके पास सब कुछ रिकॉर्ड हो जाए। हमारी बस हमारे कैंप के अंदर पार्क नहीं थी, क्योंकि हमारे साथ पुलिस की बेरहमी के बाद, हम कैंप में नहीं घुसे थे। तो, इस स्थिति में, सब कुछ सीसीटीवी में कैप्चर हो गया है। वे लड़के कभी हमारे गुरुकुल में नहीं घुसे, कभी पढ़े नहीं, और हमारा उनसे कोई लेना-देना नहीं है। वे हरदोई के एक स्कूल के स्टूडेंट हैं, जैसा कि केस में जमा की गई उनकी मार्कशीट से पता चलता है। तो, जब वे कभी यहां आए ही नहीं और उनका इस जगह से कोई लेना-देना नहीं है, तो कोई उनका कुछ कैसे कर सकता है? और तीसरा, वे यह कहकर कन्फ्यूजन फैला रहे हैं, एक सीडी है, तो क्यों क्या इसे पब्लिक नहीं किया जा रहा है। ये सभी सवाल आने वाले दिनों में पूछे जाएंगे, और उन्हें इनका जवाब देना होगा। जनता को समझना चाहिए कि कुछ लोग चोगा पहनकर सनातन धर्म को खत्म करने आए हैं। वे खुद को हिंदू कह रहे हैं। वे हिंदुओं के खिलाफ काम कर रहे हैं लेकिन वे खुद को हिंदू साबित करके ऐसा कर रहे हैं। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

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