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Gaon से दूसरे राज्य के मजदूर को निकालने लगे तो कौन करेगा फसल की कटाई

पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने कहा है कि अगर गांवों से दूसरे राज्यों के रहने वाले मजदूरों को निकालना शुरू कर दिया तो फसल की कटाई कौन करेगा। यही नहीं, किसान और मजदूर मिलकर काम करते हैं। ग्राम पंचायतों को ऐसे फरमान जारी करने से बचना चाहिए और अगर कोई विवाद है तो आपस में मिल बैठकर इसे हल करना चाहिए। यह बात वीरवार को हाई कोर्ट ने मोहाली के गांव मुद्दू संगतियां की ग्राम पंचायत की ओर से दूसरे राज्यों से गांव में रहने वाले मजदूरों को गांव छोड़ने के फरमान के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कही।

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस अनिल खेतरपाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे उसे कामों से बचना चाहिए। इस पर पंजाब सरकार ने जवाब दायर करते हुए कहा कि इस विवाद के निपटारे के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी बना दी गई है। कमेटी में डीएसपी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और दो अन्य सदस्य शामिल किया गया है। सरकार द्वारा कमेटी बनाने पर हाई कोर्ट ने याचिका निपटारा कर दिया।

हाई कोर्ट के वकील वैभव वत्स ने याचिका दायर कर कोर्ट को बताया था कि गांव मुद्दू संगतियां में रह रहे दूसरे मजदूरों को गांव छोड़ने का फरमान सुनाया गया है। इसके मुताबिक कोई भी गांव में दूसरे राज्यों के मजदूरों को रहने के लिए जगह नहीं देगा। प्रस्ताव में तर्क दिया गया कि ऐसे लोगों के रहने के कारण इलाके में आपराधिक और असामाजिक गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। कुछ आपराधिक घटनाओं में प्रवासी लोगों को संलिप्तता पाई गई थी। गांव में किसको रहना है और किसको नहीं, इसका फैसला करना पंचायत का अधिकार क्षेत्र है। इसी कारण ग्रामीणों ने मिलकर इस तरह का फैसला लिया है। याचिका में कहा गया कि संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद की जगह पर रहने का अधिकार देता है। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)

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