शहर-राज्य
राष्ट्र-पर्व पर रहे नदारत, आज विरोधी नेता जी

राष्ट्र- पर्व पर रहे नदारत,
आज विरोधी नेता जी।
संविधान हाथों में लेकर,
दिखलाते हैं रोज यहाँ।
राष्ट्र-प्रेम का नारा देकर,
करें प्रदर्शन ओज यहाँ।
देश-भक्ति से किए हिकारत,
आज विरोधी नेता जी।
वोटों का व्यापार छोड़ते,
करते बंद दुकानों को।
लाल किले पर जाकर गाते,
राष्ट्र-भक्ति के गानों को।
भूल गए अपना यह भारत,
आज विरोधी नेता जी।
ऊपर नहीं देश से कोई,
इसका भी तो ज्ञान रहे।
हो विरोध क्यों राष्ट्र,देश का,
इसका भी संज्ञान रहे।
आज़ादी पर किए शरारत,
आज विरोधी नेता जी।
-दिनेश श्रीवास्तव
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश



