Teachers Day 2024: तस्मै श्री गुरवे नमः, जानें-भारत में पांच सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस

भारत (Bharat) में पांच सितंबर (5 September) को शिक्षक दिवस (Teachers Day) मनाया जाता है। जबकि विश्व शिक्षक दिवस पांच अक्टूबर को मनाया जाता है। देशभर के सभी शैक्षणिक संस्थाओं में आज पांच सितंबर को बृहस्पतिवार को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दी हैं।
पीएम मोदी ने डॉ. राधाकृष्णन को किया नमन
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा है कि शिक्षक दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। यह युवा मस्तिष्कों को आकार देने वाले सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है। डॉ. राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि।
जानें, क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस
भारत में शिक्षक दिवस डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे। वे एक महान दार्शनिक और विद्वान थे। उन्हें 1954 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था और 1963 में उन्हें ब्रिटिश रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट की मानद सदस्यता प्रदान की गई थी। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म पांच सितंबर, 1888 को मद्रास प्रेसीडेंसी में हुआ था। प्रसिद्ध शिक्षक डॉ. राधाकृष्णन ने कलकत्ता विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। वह लेखक भी थे। उन्होंने अमेरिका और यूरोप में अपने व्याख्यानों के माध्यम से अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा दिया।
भारत में इसलिए मनाया जाता है शिक्षक दिवस
राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस कैसे बना, इसकी कहानी उनकी विनम्रता और शिक्षण पेशे के प्रति सम्मान का प्रमाण है। जब 1962 में जब डॉ. राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तो कुछ छात्र उनसे मिलने आए और उनसे अनुरोध किया कि उनका जन्मदिन पांच सितंबर को मनाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्र इस दिन को शिक्षकों को समर्पित करें। इस तरह, पांच सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
शिक्षक दिवस का महत्व
भारतीय संस्कृति गुरु और शिष्य (शिक्षक और छात्र) के बीच के रिश्ते को बहुत महत्व देती है। पांच सितंबर को शिक्षक दिवस न केवल डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती का उत्सव है, बल्कि यह शिक्षकों की लगन और कड़ी मेहनत का सम्मान भी करता है। जहाँ छात्रों को अपनी कृतज्ञता और प्रशंसा व्यक्त करने का अवसर मिलता है, वहीं शिक्षकों को आत्मचिंतन करने और छात्रों के लिए एक स्वस्थ और प्रेरक वातावरण बनाने का मौका मिलता है। (सारा जहां न्यूज नेटवर्क)



